
जयपुर/ पत्रिका. अब आमेर महल व हाथी गांव में हाथी की सफारी करना महंगा हो गया है। इसके लिए सैलानियों को 3 से 8 गुना तक दाम चुकाने पड़ेंगे। हाथीगांव में जाना भी दोगुना तक महंगा हो गया है। हाथी मालिकों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है लेकिन इससे सैलानियों की जेब कटेगी। नई दरें 15 अक्टूबर से लागू हो जाएंगी।
दरअसल, गुरुवार को अरण्य भवन में हाथीगांव के उत्थान, विकास और हाथी मालिकों की समस्या को लेकर बैठक हुई। इसमें वन विभाग के अलावा आरटीडीसी, पुरातत्व विभाग समेत कई अन्य विभाग के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में हाथी सवारी शुल्क 1100 से बढ़ाकर 3500 रुपए करने का निर्णय किया। हाथी गांव और आमेर महल दोनों जगह अब एक ही रेट तय की गई है। हाथीगांव में प्रवेश शुल्क बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। देशी सैलानी को 50 की बजाय 100 रुपए देने होंगे। डॉक्यूमेंट्री- मूवी की शूटिंग भी शुरू होगी। इसके अलावा हाथीगांव में बने रेस्ट हाउस के संचालन का जिम्मा आरटीडीसी को सौंपने पर भी बात हुई है। इसके लिए दोनों विभागों के बीच एमओयू होगा। साथ ही हाथी कल्याण कोष की वेबसाइट बनाने, हाथीगांव के सौन्दर्यकरण व हैरिटेज लुक देने, हाथियो के थान के आवंटन, बायोगैस प्लांट लगाने, सफाई के पुख्ता इंतजाम, सीसीटीवी कैमरे लगाने, पेयजल के पुख्ता इंतजाम व सैलानियों के लिए मूलभूत सुविधाएं विकसित करने का भी निर्णय लिया गया।
5 लाख का मुआवजा
बैठक में हाथियों की मौत होने पर हाथी कल्याण कोष से हाथी मालिक को अब 5 लाख का मुआवजा देने का निर्णय किया गया है। हाथी बीमा एवं पेंशन कोष की राशि को हाथी कल्याण कोष में जमा करवाई जाएगी। दिसम्बर में ऐलिफेंट फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा।
पिछले दिनों हाथी मालिकों से मिलकर मुख्यमंत्री तक उनकी पीडा पहुंचाई। इसके बाद अफसरों ने बैठक की और हाथी मालिकों को राहत दी है। विधायक ने बताया कि 13 साल बाद सफारी का किराया बढ़ना और हाथी की मौत पर मुआवजा मिलना बडी राहत है।
रफीक खान, आदर्श नगर विधायक
Published on:
06 Oct 2023 11:01 am
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