नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम रंग लाने लगे हैं। इसी की बदौलत शहर में एक दिन में तीन नेत्रदान हुए। परिजन मायूस न हों, इसलिए नेत्रदान लेने वाले चिकित्सक ने अपनी शादी की सालगिरह का कार्यक्रम अगले दिन के लिए टालना पड़ा।शनिवार को डॉ. कुलवंत गौड़ की शादी की सालगिरह थी। शाम को पार्टी थी। कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थी कि एक के बाद एक नेत्रदान के लिए फोन आना शुरू हो गया और व्यस्तता के चलते शादी की सालगिरह का आयोजन शनिवार की जगह रविवार को हो सका। इस दौरान एक दिन में तीन नेत्रदान लिए गए।
पहला नेत्रदान 67 वर्षीय स्टेशन निवासी नाथूलाल अग्रवाल का निधन हो गया है। उनका नेत्रदान करवाने के लिए मुकेश अग्रवाल ने फोन किया। उनका नेत्रदान लेने के बाद श्रीपुरा निवासी सूरज कुमारी डांगी के निधन की सूचना मिली। अंतिम संस्कार से पूर्व परिजनों से संपर्क किया तो चारों बेटों ने नेत्रदान के लिए स्वीकारोक्ति दी। वहां नेत्रदान लेने के बाद घर पहुंचे। फिर स्टेशन क्षेत्र से महावीर प्रसाद गर्ग के निधन कि सूचना मिली।
स्टेशन निवासी साथी मुकेश अग्रवाल ने परिवार वालों से बातचीत की। नेत्रदान के लिये समझाइश की। पत्नी मंजू गर्ग की स्वीकृति के बाद वहां से नेत्रदान लिया। डॉ.कुलवंत ने बताया कि शादी की सालगिरह का कार्यक्रम टलने का मलाल नहीं है, बल्कि खुशी है कि 12 घंटे में तीन जोड़ी नेत्रदान करवा पाया। चार वर्ष में ऎसा मौका पहली बार आया है।