
नई दिल्ली।
उच्चतम न्यायालय ने 2012 के निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले में तीन दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की गुहार को ठुकरा दिया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की पवन, विनय और मुकेश की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया।
पूरे प्रकरण की ख़ास बात ये है कि दोषियों की ओर से पैरवी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एपी सिंह कर रहे थे। इससे पहले एपी सिंह राजस्थान के आनंदपाल एनकाउंटर मामले के अलावा कई चर्चित मामलों से जुड़े रहे हैं। आनंदपाल मामले में भी उन्होंने गैंगस्टर रहे आनंदपाल पक्ष की पैरवी की थी। वहीं फिल्म पद्मावत को बैन मामले पर भी वे राजपूतों के पक्ष की ओर से पैरवी करने को लेकर सुर्ख़ियों में रहे थे।
दोषियों की तरफ से एपी सिंह ने मामले की सुनवाई के दौरान दलील दी थी कि ये मामला फांसी की सजा का नहीं है। दोषी गरीब पृष्ठभूमि से आए हुए हैं, वो आदतन अपराधी नहीं हैं इसलिए सुधरने का मौका दिया जाए। याचिका में फांसी की सजा पर फिर से विचार करने की गुहार लगाई गई थी।
ये था मामला
दरअसल, न्यायालय ने तीनों की पुनर्विचार याचिका पर चार मई को सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रखा था। इस मामले के एक अन्य दोषी अक्षय ने पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं की थी। पीठ के अन्य सदस्य आर भानुमति और अशोक भूषण थे।
पिछले साल पांच मई को दिये फैसले में उच्चतम न्यायालय ने निर्भया सामूहिक दुष्कर्म के चारों दोषियों मुकेश, विनय, अक्षय और पवन को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दी गई फांसी की सजा को बरकरार रखा था।
गौरतलब है कि 16 दिसम्बर 2012 को दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका से निर्भया मित्र के साथ एक निजी बस में सवार हुई तो उसके साथ बस चालक एवं उसके सहयोगियों ने सामूहिक बलात्कार और क्रूरता की थी। बाद में निर्भया की मौत हो गयी थी। दोषियों की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाये जाने के दौरान निर्भया के परिजन भी न्यायालय कक्ष में मौजूद थे।
आनंदपाल-पद्मावती फिल्म मामले में भी कर चुके हैं पैरवी
गौरतलब है कि एपी सिंह इससे पहले राजस्थान के गैंगस्टर आनंदपाल मामले में आनंदपाल पक्ष की पैरवी कर चुके हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह ने राजस्थान में विवादित फिल्म पद्मावत को लेकर भी पैरवी की थी। फिल्म को बैन किए जाने को लेकर राजपूतों की ओर से अधिवक्ता एपी सिंह मौजूद रहे थे। सिंह ने शीर्ष अदालत में करणी सेना और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की ओर से फिल्म को बैन करने की पैरवी की थी।
आनंदपाल प्रकरण में आरोपी भी रहे हैं सिंह
अधिवक्ता एपी सिंह आनंदपाल प्रकरण से जुड़े एक मामले में आरोपित भी रहे हैं। 24 जुलाई को सांवराद में आयोजित श्रदांजली सभा के बाद राजपूत नेताओं के भड़काऊ भाषण दिए जाने के बाद हुई तोड़फोड़, मारपीट और पुलिस के हथियार लूट, जानलेवा हमला, नागौर एसपी की सरकारी गाड़ी जलाने, प्रोबेशनल आईपीएस मोनिका सेन के साथ मारपीट व छेड़छाड़ मामले में जसंवतगढ़ थाने के उनके खिलाफ केस भी दर्ज किया गया था। उनके साथ ही उस मामले में राजपूत नेता सुखदेव सिंह गोगामेड़ी, आनंदपाल की बेटी चीनू, हनुमान सिंह खांगट, महीपाल सिंह, योगेन्द्र कटार, दुर्ग सिंह, रणजीत सिंह मांगडोली, रणजीत सिंह गेडिया, रणवीर सिंह गूढ़ा व अन्य समेत करीब बारह हजार लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में केस दर्ज करवाया गया था।
Updated on:
09 Jul 2018 03:26 pm
Published on:
09 Jul 2018 03:22 pm
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