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निर्जला एकादशी पर बन रहा है सर्वार्थ सिद्घी व गजकेसरी योग

कल 23 जून को मनाई जाएगी शहर में निर्जला एकादशी

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जयपुर

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Mohan Murari

Jun 22, 2018

Nirjla Ekadashi

निर्जला एकादशी पर बन रहा है सर्वार्थ सिद्घी व गजकेसरी योग

— इस एकादशी को भीमसैनी एकादशी भी कहा जाता है
— गोविन्ददेवजी, ब्रजनिधिजी, आनंदकृष्ण बिहारीजी सहित कई मंदिरों में सजेगी जलविहार की झांकी

जयपुर। 23 जून को निर्जला एकादशी भक्तिभाव के साथ मनाई जाएगी इसमें व्रती बिना अन्न और जल के उपवास रखेंगे। स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य उदय होने के कारण इसे भीमसैनी एकादशी भी कहा जाता है। निर्जला एकादशी शनिवार को सुबह 3.19 मिनट से प्रारंभ होकर 24 जून को 3.52 मिनट तक रहेगी। 23 जून को सूर्य उदय से रात्रि अंत तक सर्वार्थ सिद्घी योग के साथ गुरु व चंद्र का गजकेसरी योग बन रहा है। जिससे यह व्रत अधिक फलदायी हो जाएगा। गोविन्ददेवजी, ब्रजनिधिजी, आनंदकृष्ण बिहारीजी सहित कई मंदिरों में जल विहार की झांकियां सजाई जाएगी। गोनेर के लक्ष्मी जगदीश मंदिर के मेला लगेगा।

चलेगा दान—पुण्य का दौर

पंडित सुरेश शास्त्री के अनुसार इस दिन 'ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करके गौदान, वस्त्रदान, छत्र, फल आदि दान करना चाहिए। इस दिन शक्कर युक्त जल का घड़ा भर कर उस पर आम, खरबूजा, बिजणी रख कर मंदिर में रखने या ब्राह्मण को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस मौके पर शहर में जगह—जगह शरबत, शिकंजी एवं केवडा युक्त जल की छबीलें लगाई जाएंगी। लोग खूब दान पुण्य करेंगे। इस दिन व्रत करने के अतिरिक्त जप, तप गलता स्नान, गंगा स्नान आदि कार्य करना शुभ रहता है। संभव हो सके तो व्रत की रात्रि में जागरण करना चाहिए।

निर्जला एकादशी व्रत का महत्व
पं. राजकुमार चतुर्वेदी के अनुसार इस एकादशी का व्रत करना सभी तीर्थों में स्नान करने के समान है। निर्जला एकादशी का व्रत करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्ति पाता है, जो मनुष्य़ निर्जला एकादशी का व्रत करता है उनको मृत्यु के समय मानसिक और शारीरिक कष्ट नहीं होता है। इस व्रत को करने के बाद, जो व्यक्ति स्नान, तप और दान करता है, उसे करोड़ों गायों को दान करने के समान फल प्राप्त होता है।