
पटाखों से ध्वनि या वायु प्रदूषण फैलाया तो खैर नहीं, 13 जिलों पर रहेगी नजर
जयपुर। राज्य सरकार ने राजस्थान में पटाखे बेचने और चलाने की अनुमति तो दे दी है, लेकिन केवल ग्रीन पटाखे ही चलाने होंगे। यदि पटाखा चलाने के दौरान ध्वनि प्रदूषण या वायु प्रदूषण फैला तो खैर नहीं। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी जिला कलक्टरों को पटाखों से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण करने वाले पटाखों को प्रतिबंधित करने के सम्बंध में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। बड़ी बात यह है कि दिलावी से पहले और दिवाली वाले दिन ध्वनि अनुश्रवण एव वायु प्रदूषण स्तर की जांच की जाएगी। राजस्थान में 13 जिलों पर विशेष नजर रहेगी, जहां पटाखें बड़ी संख्या में चलाए जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का हवाला
प्रदूषण नियंत्रण मंडल सदस्य सचिव आनन्द मोहन ने बताया कि दिवाली पर प्रदेश में नागरीक रात में पटाखों के अलावा जमकर आतिशबाजी करते हैं, जिससे ना केवल ध्वनि प्रदूषण होता है बल्कि वायु प्रदूषण भी फैलता है। इस सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई, 2005 को निर्णय पारित किया था कि ध्वनि प्रदूषण करने वाले पटाखों को प्रतिबंधित किया गया है।
इन 13 जिलों में होगी जांच
राजस्थान मण्डल कार्यालय यथा अलवर, बालोतरा, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बीकानेर, चित्तौड़गढ, जोधपुर, किशनगढ, कोटा, पाली, सीकर, उदयपुर और जयपुर शहर में 29 अक्टूबर व 4 नवम्बर को ध्वनि अनुश्रवण एव वायु प्रदूषण स्तर की जांच की जाएगी। राज्य मण्डल द्वारा वायु की गुणवत्ता की जांच क लिए जयपुर, उदयपुर, कोटा, जोधपुर व अलवर में वायु परीक्षण करने के निर्देश भी जारी किए हैं।
यह अनुमति दी थी
अब दिवाली, गुरुपर्व, छठ पर्व, क्रिस्मस और न्यू ईयर पर जमकर आतिशबाजी की जा सकेगी। इस बार भी सरकार ने केवल ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमित दी है। जिस शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स POOR या उससे खराब है वहां उस दिन आतिशबाजी चलाने पर रोक रहेगी। एनसीआर क्षेत्र में आतिशबाजी को बेचने व चलाने पर प्रतिबंध रहेगा। ग्रीन आतिशबाजी की पहचान प्रत्येक आतिशबाजी के बाॅक्स पर नीरी द्वारा जारी किए गए QR कोड को स्कैन करके की जा सकेगी।
Published on:
29 Oct 2021 07:16 pm
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