
ये हैं ऐसे अफसर, भाजपा सरकार में आते हैं, कांग्रेस में चले जाते हैं
ओमप्रकाश शर्मा / जयपुर। भाजपा सरकार में विशेष पुलिस महानिदेशक बनाए गए एनआरके रेड्डी ने कांग्रेस सरकार के आते ही डीजी (जेल) बनने के बाद दिल्ली की राह पकड़ ली है। रेड्डी ने राज्य सरकार से केन्द्र में प्रतिनियुक्ति की अनुमति मांगी, जो उन्हें हाथों-हाथ मिल भी गई। रेड्डी के नेशनल पुलिस अकादमी में प्रतिनियुक्त होने की संभावना है।
रेड्डी वरीयता सूची में मौजूदा पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग और सरकार बदलते ही हटाए गए ओमप्रकाश गल्होत्रा के बाद सबसे वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी हैं। इसके बाद सूची में डीजी (एसीबी) आलोक त्रिपाठी का नम्बर है। गल्होत्रा भी केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए प्रयासरत हैं।
दरअसल कांग्रेस ने सत्ता में आते ही गल्होत्रा और रेड्डी दोनों को भाजपा सरकार का करीबी मानते हुए ठण्डे पदों पर लगा दिया था। अब गर्ग भी जून के अंत में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। उनकी सेवानिवृति को ध्यान में रखकर सरकार को अब नए डीजी की तलाश शुरू करनी है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार वरिष्ठता को दरकिनार करना सरकार के लिए हर बार संभव नहीं है। ऐसे में जब रेड्डी ने राज्य से केन्द्र में प्रतिनियुक्ति की अनुमति मांगी तो मुख्यमंत्री कार्यालय से तत्काल मंजूरी मिल गई। जबकि इससे पहले कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने मौखिक तौर पर प्रतिनियुक्ति की मंजूरी मांगी तो उन्हें मना कर दिया गया।
रेड्डी इससे पहले गहलोत सरकार के दोनों कार्यकाल में लम्बी प्रतिनियुक्ति पर रह चुके हैं। इसमें भी संयोग रहा कि कांग्रेस शासन में वह प्रतिनियुक्तियों पर रहे जबकि भाजपा शासन में फिर राजस्थान लौट आए। पहली गहलोत सरकार के आते ही रेड्डी जुलाई 1999 में प्रतिनियुक्ति पर चले गए। फिर 7 साल बाद जुलाई 2006 में वसुंधरा राजे सरकार के समय राजस्थान लौटे। इसके बाद फिर गहलोत सरकार आई तो सितम्बर 2009 में प्रतिनियुक्ति पर चले गए। फिर वसुंधरा सरकार लौटी तो जनवरी 2015 में राजस्थान लौट आए। अब फिर गहलोत सरकार के समय उन्होंने प्रतिनियुक्ति की राह पकड़ी है।
Published on:
14 Feb 2019 07:30 am
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