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चंडीगढ़ के कॉलेज की तरह ही राजस्थान के इस कॉलेज में भी हो चुकी बड़ी घटना, इस कॉलेज में लड़कियों के न्यूड फोटो खींचकर कॉल गर्ल बना दिया था, कई सुसाइड़ हुए

इस महाकांड के ट्रायल अभी भी चल रहे हैं। अजमेर में अब भी यदा कदा तारीखें पड रही हैं और केस से संबधित लोग कचहरी के चक्कर काटे जा रहे हैं। हंालाकि केस से संबधित अधिकतर लोगों ने इस मामले से दूरी बना ली है यही कारण है कि यह पूरा मामला डंप पडा है।

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जयपुर
चंडीगढ़ के एक कॉलेज में साठ लड़कियों का एमएमएस सामने आने के बाद बवाल मचा हुआ है। लेकिन यह बवाल राजस्थान के अजमेर में करीब तीस साल पहले एक बड़े इंग्लिश मीडियम स्कूल में हुए महाकांड के आगे कुछ नहीं है। इस महाकांड का दंश आज भी लड़कियां.... जो कि अब दादी नानी तक बन चुकी हैं, वे झेल रही हैं। इस महाकांड के बाद कई लड़कियों ने आने वाले तीन से चार साल के दौरान सुसाइड़ तक कर लिया था। इस महाकांड के ट्रायल अभी भी चल रहे हैं। अजमेर में अब भी यदा कदा तारीखें पड रही हैं और केस से संबधित लोग कचहरी के चक्कर काटे जा रहे हैं। हंालाकि केस से संबधित अधिकतर लोगों ने इस मामले से दूरी बना ली है यही कारण है कि यह पूरा मामला डंप पडा है।

अप्रेल 1992 में सामने आया था मामला, कॉलेज और स्कूल की लड़कियों के नहाते समय फोटो लिए गए थे...
दरअसल अजमेर के नामी स्कूल और कॉलेज में साल 1992 का यह पूरा केस है। उस सयय कम उम्र की लड़कियों की नहाने के दौरान कई दिनों तक चुपके से फोटोज खीचें गए। उसके बाद इन्हें वायरल नहीं किया गया उल्टे वायरल करने की धमकी देकर उन्हीं लड़कियों को भेजना शुरु कर दिया गया। उसके बाद उन लड़कियों की बदनामी करने का डर दिखाकर उन्हें कॉल गर्ल तक बना दिया गया। कई प्रतिष्ठित लोगों के पास उन्हें भेजा जाने लगा। मामला जब सामने आया तब बवाल मच गया। कई लड़कियों ने बदनामी के बाद सुसाइड़ तक कर लिया था। यहां तक की कुछ निजी मैगजीन में उन लड़कियों की धुंधली तस्वीरें तक प्रकशित करने की बात सामने आई। मालमा इतना बड़ा हो गई कि मई के महीने में पुलिस ने कुछ आरोपियों के खिलाफ एनएसए के तहत केस तक दर्ज किया गया। एनएसए यानि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून है।

तब से लेकर अब तक इतने आरोपी बने, इतने जेल गए और इतने बरी हो गए......
अप्रेल 1992 में जब इस मामले का खुलासा हुआ तो उसके बाद पुलिस ने 18 आरोपी नामजद किए। इस जांच में तीस से ज्यादा थानों के दर्जनों एसएचओ, आईपीएस और आरपीएस शामिल हुए। जांच का दायरा पूरा राजस्थान था। शुरुआती जांच में 15 लड़कियों ने बयान दर्ज कराए। हांलाकि बदनामी के डर से बाद मे कई बयान देने नहीं आई। यह केस जिला अदालत से राजस्थान हाई कोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट, फास्ट ट्रैक कोर्ट, महिला अत्याचार अदालत और पॉक्सो कोर्ट में घूमता रहा। 1998 मे आठ दोषी करा दिए गए। 2001 में चार बरी हो गए। उसके बाद बाकि बचे चार की सजा दस साल कर दी गई। केस मे गवाही के लिए पीडिताओं के नहीं आने के कारण अधिकतर आरोपी बच निकले। हांलाकि बताया जा रहा है कि अभी भी यदा कदा कोई पीडिता कई बार बुलाने के बाद गवाही देने पहुंच रही है। लेकिन अधिकतर के नहीं आ पाने के कारण यह केस फाइलों में दफन होता जा रहा है।