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लड़कों के मुकाबले लड़कियों के अनुपात पर संशय, आंकड़ों से उपजा सवाल, बेटियों की संख्या घटी या बढ़ी

राजस्थान ने भ्रूण परीक्षण कारोबार का रंगे हाथों खुलासा करने में देश के सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।

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जयपुर
। राजस्थान ने पिछले कुछ सालों के दौरान भ्रूण परीक्षण कारोबार का रंगे हाथों खुलासा करने में देश के सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश में अब तक भ्रूण परीक्षण करने वाले 82 मामलों का खुलासा किया जा चुका है आैर गिरफ्तारियां भी हुई हैं। केवल इतना ही नहीं, पीबीआई थाने का गठन कर भ्रूण परीक्षण से जुड़े हर मामले की गहराई से तहकीकात करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है। लेकिन इन सारी कवायदों के बावजूद और राज्य सरकार के दावों के बीच का विरोधाभास चौंकाता है। अगर जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो राजस्थान में वर्ष 2009-11 में प्रति 1000 पुरुषों की तुलना में महिलायें 878 थी जो कि 2013-15 में 17 अंकों की गिरावट के साथ 861 हो गई । जबकि राजस्थान सरकार के संस्थागत प्रसव के आंकड़ों के हिसाब से प्रदेश का सेक्स अनुपात इस समय 1000 पुरुषों पर 943 महिलाओं का है। गौरतलब है कि पिछले पांच सालों में राजस्थान में करीब डेढ़ लाख बेटियों को कोख में मरने से बचाने का दावा किया जा रहा है।

राजस्थान (2009-11)

1000 पुरुषों पर 878 महिलाएं


2013-15 में
17 अंकों की गिरावट के साथ 861 हो गई

क्यों है यह विरोधाभास
आंकड़ों में इस विरोधाभास पर पीसीपीएनडीटी और डिकोय से जुड़े लोगों का कहना है कि जनगणना के आंकड़े सैंपल सर्वे आधारित हैं। जबकि राजस्थान सरकार के आंकड़े वास्तविक और प्रदेश में जन्म ले रहे 80 से 90 प्रतिशत शिशुओं के आधार पर संस्थागत प्रसव से लिए गए हैं।

डेढ़ लाख बेटियों को बचाने का दावा
2010-11 से अब तक संस्थागत प्रसव के आंकड़े देखें तो लड़कों की तुलना में 1.29 लाख बेटियां ज्यादा जन्मी। जबकि संस्थागत प्रसव से अलग प्रसव वाली करीब 20 हजार बेटियां भी हैं। यानि प्रदेश में एक साल मे करीब डेढ़ लाख बेटियों को बचाया गया।

प्रदेश ने डिकोय में कीर्तिमान बनाया है। इसीका नतीजा सामने आ रहा है संस्थागत प्रसव के आंकडों से, जो कि प्रदेश में जन्म ले रहे करीब करीब सभी शिशुओं पर आधारित है। प्रदेश में पुरुष महिला अनुपात में लगातार सुधार आ रहा है। यह अब 943 पहुंच गया है।
-राजन चौधरी, डिकोय से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता।