
राजस्थान (2009-11)
1000 पुरुषों पर 878 महिलाएं
2013-15 में
17 अंकों की गिरावट के साथ 861 हो गई
क्यों है यह विरोधाभास
आंकड़ों में इस विरोधाभास पर पीसीपीएनडीटी और डिकोय से जुड़े लोगों का कहना है कि जनगणना के आंकड़े सैंपल सर्वे आधारित हैं। जबकि राजस्थान सरकार के आंकड़े वास्तविक और प्रदेश में जन्म ले रहे 80 से 90 प्रतिशत शिशुओं के आधार पर संस्थागत प्रसव से लिए गए हैं।
डेढ़ लाख बेटियों को बचाने का दावा
2010-11 से अब तक संस्थागत प्रसव के आंकड़े देखें तो लड़कों की तुलना में 1.29 लाख बेटियां ज्यादा जन्मी। जबकि संस्थागत प्रसव से अलग प्रसव वाली करीब 20 हजार बेटियां भी हैं। यानि प्रदेश में एक साल मे करीब डेढ़ लाख बेटियों को बचाया गया।
प्रदेश ने डिकोय में कीर्तिमान बनाया है। इसीका नतीजा सामने आ रहा है संस्थागत प्रसव के आंकडों से, जो कि प्रदेश में जन्म ले रहे करीब करीब सभी शिशुओं पर आधारित है। प्रदेश में पुरुष महिला अनुपात में लगातार सुधार आ रहा है। यह अब 943 पहुंच गया है।
-राजन चौधरी, डिकोय से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता।
Published on:
11 Aug 2017 09:28 am
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
