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जीवन की संध्या में भी आस्था का उजास, तीर्थांटन कर रहे बुजुर्ग दम्पती बने प्रेरणा स्रोत

बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली के बीच राजधानी में आस्था की एक सशक्त और प्रेरक तस्वीर उभरकर सामने आ रही है।

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जयपुर

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Harshit Jain

Jan 08, 2026

जयपुर. बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली के बीच राजधानी में आस्था की एक सशक्त और प्रेरक तस्वीर उभरकर सामने आ रही है। उम्र के पड़ाव को पीछे छोड़ते हुए बुजुर्ग दम्पती अब घर की चारदीवारी में सिमटने के बजाय तीर्थ यात्राओं और परिक्रमा के माध्यम से अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रहे हैं। बीते दो महीनों में बड़ी संख्या में बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने ब्रज की 84 कोस परिक्रमा, नर्मदा परिक्रमा सहित अन्य तीर्थ यात्राएं पूरी की हैं। नए साल में भी शहर से एक सप्ताह के भीतर बड़ी संख्या में बुजुर्गों ने तीन धाम, 84 कोस परिक्रमा और नर्मदा परिक्रमा संपन्न की है।

होती है आत्मिक शांति की अनुभूति

धार्मिक संगठनों और मंदिर समितियों के अनुसार हाल के दिनों में बुजुर्गों की भागीदारी में लगातार वृद्धि हुई है। विशेष रूप से नर्मदा परिक्रमा और 84 कोस यात्रा में जयपुर के श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। इन यात्राओं के दौरान पति-पत्नी एक-दूसरे का सहारा बनते हैं, थकान में संबल देते हैं और हर कदम प्रभु के नाम के साथ आगे बढ़ाते हैं। जय जवान कॉलोनी निवासी राधेश्याम शर्मा और पार्वती देवी ने बताया कि ब्रज की 84 कोस परिक्रमा उनके लिए केवल यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और जीवन को अर्थ देने का माध्यम है। नियमित भजन, नाम-स्मरण और सेवा भाव ने उनके मन और तन दोनों को सशक्त रखा है।

600 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की

कालवाड़ रोड बजरंग द्वार निवासी 62 वर्षीय देवेंद्र सिंह खंगारोत ने बताया कि हाल ही उन्होंने नर्मदा परिक्रमा पूरी की है। इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने लगभग 600 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की, जबकि शेष परिक्रमा बस के माध्यम से संपन्न की। इससे पूर्व वे देश के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी कर चुके हैं। बीते वर्ष पंच कैलाश में से दो कठिन तीर्थ—श्रीखंड महादेव और किन्नर कैलाश की दुर्गम यात्राएं भी पूरी कर चुके हैं। अब उनका लक्ष्य कैलाश मानसरोवर यात्रा को पूर्ण करना है।

35 दिन तीर्थांटन में बिताए


सांगानेर मधुविहार कॉलोनी निवासी ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि वे दो दिन पहले ही पत्नी के साथ 35 दिन की तीन धाम यात्रा पूरी कर लौटे हैं। इस दौरान उन्होंने 11 ज्योतिर्लिंगों के साथ तीन धाम द्वारकाधीश, रामेश्वरम और जगन्नाथपुरी के दर्शन किए। यह यात्रा उनके लिए केवल दर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि आत्मिक शांति और प्रभु से जुड़ाव का अनुभव बनी। क

ठिन मार्ग, लंबी दूरी और मौसम की चुनौतियां जरूर रहीं, लेकिन श्रद्धा और विश्वास ने हर थकान को दूर कर दिया। प्रत्येक धाम में पूजा-अर्चना के बाद मन में अपार शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। यात्रा ने जीवन को देखने का दृष्टिकोण बदल दिया, साथ ही संयम, सेवा और सहनशीलता का भाव और प्रबल हुआ। आदित्य शर्मा ने बताया कि माता-पिता के सकुशल लौटने पर परिवारजनों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया।