
कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए कांग्रेस सरकार की ओर से शुरू की गई विद्या संबल योजना पर संकट मंडरा रहा है। दो माह बाद कॉलेजाें में लगे एक हजार अस्थायी शिक्षकों को हटा दिया जाएगा। वहीं, अभी तक इस योजना के तहत नए अस्थायी शिक्षकों को लगाने के लिए कॉलेज आयुक्तालय की ओर से नोटिफिकेशन नहीं निकाला गया है। ऐसे में कॉलेजों से अस्थायी शिक्षकों के हटने से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा। दरअसल, कॉलेजों में इसी सत्र से राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है। ऐसे में सेमेस्टर सिस्टम से पढ़ाई कराने के लिए कॉलेजों में शिक्षकों की जरूरत है। कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों के सात हजार पद रिक्त चल रहे हैं।
भर्ती पूरी होने में लगेंगे दो साल
आरपीएससी की ओर से करीब 1900 पदों पर सहायक आचार्य की भर्ती की जा रही है। इसकी परीक्षाएं नए साल से शुरू होंगी। ऐसे में भर्ती पूरी हाेने में करीब दो साल का समय लगेगा। विद्या संबल योजना के अस्थायी शिक्षक नहीं हाेने से कॉलेजों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा जाएगी। सबसे अधिक समस्या राजसेस सोसायटी के कॉलेजों में होगी।
भाजपा सरकार के लिए चुनौती
पूर्व कांग्रेस सरकार ने राजस्थान में कॉलेजों की संख्या तो बढ़ा दी, लेकिन कॉलेजों में संसाधन और शिक्षकों की कमी है। इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में उच्च शिक्षा का ढांचा बिगड़ा हुआ है। आलम यह है कि दो या तीन शिक्षकों के भरोसे कॉलेज चल रहे हैं। नई सरकार के सामने कॉलेजों के बिगड़े ढांचे को सुधारने सहित रिक्त चल रहे शिक्षकों के पदों को भरने की बड़ी चुनौती होगी।
कॉलेजों की संख्या पर्याप्त है, लेकिन अब इनके आधारभूत ढांचे को विकसित करने की जरूरत है। कॉलेजों को भवन मिलने चाहिए। इसके अलावा स्थायी शिक्षक नियुक्त नहीं होने तक विद्या संबल योजना के तहत अस्थायी शिक्षक लगाए जाने चाहिए। इससे कॉलेजों में पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।
- डॉ. बनय सिंह, महामंत्री रूक्टा
Published on:
27 Dec 2023 01:16 am
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