
जयपुर। रतनगढ़ और सरदारशहर के बीच बसा मालासर गांव। गांव में 24 जून 2017 की रात दस बजे लोग खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहे थे। तभी ताबड़तोड़ गोलियों की आवाज से एकाएक लोगों की नींद उड़ गई।
गोलियों का केन्द्र था सडक के किराने बना श्रवण सिंह राजपूत का घर। एसओजी और पुलिस की गाडि़यों के साथ वहां आसपास के लोगों की भी भीड़ जुटने लगी, लेकिन दोनों तरफ से जमकर हो रही गोलीबारी की वजह के चलते किसी की आगे जाने की हिम्मत नहीं हुई।
ढाई घंटे तक लोग दहशत में रहे। आखिर रात करीब बारह बजे...सूचना बाहर आई...आनंदपाल मारा गया। राजस्थान में दहशत का दूसरा नाम बन चुका गैंगस्टर आनंदपाल सिंह को ठीक एक साल पहले आज ही के दिन 24 जून 2017 की रात एसओजी और पुलिस की टीम ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया था।
आखिर करीब दो साल से फरारी काट रहे आनंदपाल को एक शख्स की वजह से पकड में आ गया। आप साेच रहे हाेंगे कि वाे काैन था। बता दें कि वाे काेर्इ आैर नहीं वह आनंदपाल का भार्इ था।
एनकाउंटर की बात सुन टूट गया था गट्टू और बता दिया सब कुछ
एसओजी ने हरियाणा से आनंदपाल के भाई विक्की उर्फ रूपेश और देवेंद्र उर्फ गट्टू को दबोच लिया था। दोनों से काफी समय तक एसओजी ने पूछताछ की, लेकिन कुछ नहीं बोले। इसके बाद टीम ने अपने तरीके से काम लिया और दोनों काे एनकाउंटर करने की धमकी दी।
इस पर विक्की टस से मस नहीं हुआ, लेकिन गट्टू टूट गया। उसने ही एसओजी को आनंदपाल की पगाहगाह के बारे में बताया। एसओजी टीम ने आईजी दिनेश एमएन को आनंदपाल के ठिकाने के बारे में बताया।
दिनेश एमएन के आदेश पर टीम ने आनंदपाल के फरार होने को लेकर संभावित रास्तों के बारे में छानबीन की। फिर कमांडो की मदद से चूरू से एमपी और हरियाणा के जाने वाले समस्त रास्तों को बंद कर दिया था। हर जगह नाकाबंदी लगा दी। इसके बाद एसओजी ने मकान चिह्नित करके उसे घेर लिया था। आनंदपाल के एनकाउंटर को लेकर एसओजी टीम भी हैरान रह गई थी। उसके पास जो आनंदपाल का चेहरा था, उससे उसका हुलिया बहुत अलग था।
Published on:
24 Jun 2018 02:37 pm
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