
जयपुर। नगर निगम महापौर के रूप में अशोक लाहोटी ने एक साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। एक साल के कार्यकाल के दौरान शहर में कुछ नई योजनाओं की शुरूआत हुई तो बहुत से ऐसे मुद्दे रहे जहां पर निगम को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। हिंगोनिया गौशाला में गायों की मौत और भाजपा पार्षदों की नाराजगी के मुद्दे पर ठीक एक साल पहले भाजपा को महापौर बदलना पड़ा था। नगर निगम चुनाव के वक्त मेयर बनने की दौड़ में सबसे आगे रहे अशोक लाहोटी उस वक्त तो चूक गए, लेकिन गायों की मौत के मुद्दे पर हटाए गए तत्कालीन महापौर निर्मल नाहटा की जगह लेने में कामयाब रहे। दिसम्बर 2016 में लाहोटी की ताजपोशी को जयपुर की तस्वीर बदलने के दावे के साथ जोरशोर से लोगों तक पहुंचाया गया। लेकिन अपने एक साल के कार्यकाल में महापौर के रूप में अशोक लाहोटी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए इससे लोगों को निराशा ही हाथ लगी है।
अब तक ये किए हैं काम -
घर—घर से कचरा संग्रहण योजना को शहर के सभी 91 वार्ड में शुरू किया, बिना निगम का पैसा खर्च किए व्यापार मंडलों के सहयोग से बाजारों में 2 लाख डस्टबिन शहर के बाजारों—दुकानों में रखवाए, एक लाख लाइट्स को एलईडी में बदला, 30 हजार नई एलईडी लाइट्स लगाई। महापौर जनसुनवाई शुरू की। 3,400 पट्टे वितरित किए। 160 कर्मचारियों को निगम में नियुक्ति दी। सब्जी मंडियों को छोड़कर शहर में पॉलिथीन के प्रयोग पर रोक लगाई। हिंगोनिया गौशाला का संचालन अक्षय पात्र को सौंपा, स्वच्छता के लिए पार्षदों—लोगों को दिखाई फिल्म, शहर में जगह—जगह दौरे किए, खुद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में गए।
अब तक ये रही नाकामियां -
नहीं बना पाए नगर निगम की समितियां, विकास नहीं होने से भाजपा पार्षद नाराज दूर नहीं कर पाए अपने ही पार्षदों की नाराजगी, हिंगोनिया गौशाला में नहीं रूकी गायों की मौत, शहर के लोगों को नहीं दे पाए मल्टी स्टोरी पार्किंग, आवारा सांड की टक्कर से विदेशी पर्यटक की मौत नगर निगम की नाकामी से जयपुर की हुई किरकिरी अतिक्रमण, अवैध निर्माण पर नहीं लगा पाए रोक, आयुक्त के विवाद से निगम का कामकाज हुआ बाधित, राजधानी को नहीं बना पाए क्लीन सिटी, नहीं सुधार पाए जयपुर की स्वच्छता रैंकिंग, नगर निगम के 900 पार्क सूखने की कगार पर उद्यानिकी ठेकेदारों का नहीं करवा पाए भुगतान, प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं मना जयपुर स्थापना दिवस फीका रहा नगर निगम का आयोजन, निगम के हिस्से आए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, अधूरे मेयर नहीं दे पाए विकास कार्यों को गति, जयपुर को नहीं बना पाए ओडीएफ, ओडीएफ का दावा सिर्फ कागजी साबित
आपको बता दें कि राजधानी में सांड की टक्कर से विदेशी सैलानी की मौत से जयपुर की किरकिरी हुई थी, इस बारे में महापौर अशोक लाहोटी का कहना है कि आवारा सांड की टक्कर से विदेशी पर्यटक की मौत होना दुखद हादसा था। नगर निगम 15 हजार गौवंश को हिंगोनिया गौशाला में रखकर उनकी देखभाल कर रहा है। निगम हिंगोनिया गौशाला पर सालाना 50 करोड़ रूपए खर्च कर रहा है। शहर में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो गायों का दूध दोहने के बाद उन्हें खुला छोड़ देते हैं। इससे सड़कों पर आवारा मवेशी घूमते नजर आते हैं। लोगों से अपील है कि वे गाय को माता समझें और दूध दोहने के बाद लावारिस ना छोड़ें। जब गाय का दूध पीते हैं, तो उसकी देखभाल भी करें।
Published on:
14 Dec 2017 11:28 am

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