
लोग हो जाते हैं हैरान कि यह फोटो है या पेंटिंग
रूस में जन्मे स्टीफन पाब्स्ट 15 साल की उम्र से जर्मनी में रह रहे हैं। 2007 में, उन्होंने पेंटिंग और ड्रॉइंग पोर्ट्रेट शुरू किए, लेकिन जल्दी से इससे ऊब गए और किसी तरह से कागज के 2 डी बॉर्डर को पार करने का रास्ता तलाशने लगे। जब उन्होंने अपनी प्रतिभा की सीमाओं का पता लगाना जारी रखा, तो एनामॉर्फिक इल्यूजन आर्ट उन्हें पसंद आई और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे अपने दिमाग से ऐसे ऑप्टिकल इल्यूजन बनाते हैं कि शक होता है चित्र असली हैं।
पाबस्ट की कलाकृतियां कभी-कभी इतनी अच्छी हो जाती हैं कि अक्सर सोशल मीडिया पर उनके द्वारा पोस्ट की गई तस्वीरों की यह कह कर आलोचना होने लगती है कि उन्होंने किसी कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर का उपयोग किया है। सौभाग्य से, वह स्पीड-ड्रॉइंग और स्पीड-पेंटिंग वीडियो भी अपलोड करते हैं, साथ ही बताते हैं कि एनामॉर्फिक प्रभाव कैसे काम करता है। कभी कभी तो खुद अपना काम भी उन्हें परेशान कर डालता है। उन्होंने बताया: एक बार मैंने मकड़ी की पेंटिंग की, तो इससे मुझे थोड़ी परेशानी महसूस हुई। मुझे पता था कि यह वास्तविक नहीं थी लेकिन मुझे लग रहा था कि यह खतरनाक और घृणित है।
स्टीफन पाब्स्ट का कहना है कि वे लोगों को प्रेरित करने की उम्मीद लिए यह काम करते हैं कि अगर कोई चाहे तो वह कुछ भी कर सकता है, अगर वह वास्तव में अपना दिमाग लगाता है।
इंस्टाग्राम पर 3dpainterpabst के नाम से इस टैलेंटेड आर्टिस्ट के पास भविष्य के लिए बड़ी योजनाएं हैं, एनामॉर्फिक कला को वे कई सब्जेक्ट्स के साथ संयोजित करना चाहते हैं।
Published on:
24 Mar 2020 05:03 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
