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Organ Transplant Case : अस्पतालों में किडनी प्रत्यारोपण ठप, ट्रांसप्लांट के लिए भटक रहे मरीज -परिजन, एक महीने से 13 जिंदगियां दांव पर

Organ Transplant Fake NOC : अंग प्रत्यारोपण के लिए फर्जी एनओसी जारी करने के रैकेट का खुलासा होने के बाद जयपुर शहर में सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल सहित अधिकांश निजी अस्पतालों में भी लाइव किडनी प्रत्यारोपण करीब-करीब ठप हो गया है। इसकी कीमत उन मरीजों को चुकानी पड़ रही है, जिनके पास वास्तविक ब्लड रिलेटिव सहित सभी दस्तावेज उपलब्ध हैं।

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Organ Transplant Case

विकास जैन
Organ Transplant : अंग प्रत्यारोपण के लिए फर्जी एनओसी जारी करने के रैकेट का खुलासा होने के बाद जयपुर शहर में सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल सहित अधिकांश निजी अस्पतालों में भी लाइव किडनी प्रत्यारोपण करीब-करीब ठप हो गया है। इसकी कीमत उन मरीजों को चुकानी पड़ रही है, जिनके पास वास्तविक ब्लड रिलेटिव सहित सभी दस्तावेज उपलब्ध हैं। कुछ मरीज तो ऐसे हैं, जिनका प्रत्यारोपण 25 से 30 दिन पहले ही हो जाना था, लेकिन अब तक इन्हें एनओसी नहीं मिल रही। एक महीने में सरकार के हर दर पर ये चक्कर लगा चुके, लेकिन इन्हें मदद नहीं मिल पा रही। ऐसे 13 मरीज बताए जा रहे हैं, जिनके दस्तावेजों का सत्यापन और उसके बाद उन्हें एनओसी नहीं मिल रही।

पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि पहले फर्जी एनओसी रैकेट का खुलासा होने और उसके बाद सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व अधीक्षक को हटाकर नई नियुक्तियां होने से एनओसी अटक गई। राज्य सरकार ने नई नियुक्तियां तो कर दी, लेकिन कमेटियों के चेयरमेन अब तक नहीं बनाए हैं। पिछली कमेटी में चेयरमेन के तौर पर प्राचार्य डॉ.राजीव बगरहट्टा का नाम सहित चेयरमेन पद के लिए उल्लेख था। ऐसे में नए प्राचार्य डॉ.दीपक माहेश्वरी के नाम से पृथक आदेश जारी हुए बिना कमेटी की मीटिंग और एनओसी जारी नहीं हो पा रही।

अधिकांश निजी अस्पतालों में भी ठप

इस समय सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज में नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग में प्रत्यारोपण किया जाता है। यह सुविधा अब सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में उपलब्ध है। लेकिन यहां भी फर्जी रैकेट का खुलासा होने के बाद प्रत्यारोपण न के बराबर हो रहे हैं। इस अस्पताल के पास लाइसेंस की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े हो चुके हैं। एसएमएस से पृथक होने के बाद अब यह सुविधा पृथक भवन में है। पूरे मामले में फोर्टिस अस्पताल, ईएचएसीसी और मणिपाल हॉस्पिटल के ऑर्गन ट्रांसप्लांट लाइसेंस पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं।

मरीज के परिजन

मेरे ताऊजी के पुत्र देवीशंकर शर्मा पुत्र प्रेमकुमार शर्मा की किडनी खराब है। जिसके चलते एक दिन छोड़कर एक दिन डायलिसिस करवाना पड़ रहा है। मरीज की माताजी जानकी देवी अपने पुत्र को किडनी देना चाहती है। जिसको लेकर विभागीय कार्रवाई भी पूरी कर दी गई है। इसके बाद भी किडनी को लेकर कोई उचित समाधान नहीं हो पा रहा है। मरीज के पिता की पूर्व में मृत्यु हो चुकी है। मरीज खुद राजकीय सेवा में है। मरीज के किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर की जाने वाली सारी कार्रवाई करके फ़ाइल एसएमएस अस्पताल में दे दी गई है। वर्तमान में मरीज देवीशंकर की हालत गंभीर बनी हुई है। निवेदन है कि जल्द से जल्द मरीज को राहत देने का कष्ट करें।

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