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Bulldozer Action: जयपुर में JDA का बड़ा एक्शन, 6 बीघा में बस रहीं 2 अवैध कॉलोनियां ध्वस्त, हटाया अतिक्रमण

Jaipur Development Authority: राजधानी में अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमण के खिलाफ जेडीए ने सख्त रुख अपनाते हुए गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की। 6 बीघा कृषि भूमि पर विकसित की जा रही दो अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया।

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JDA

पत्रिका फाइल फोटो

Illegal Encroachment Removed By JDA: जेडीए की प्रवर्तन शाखा ने गुरुवार को 6 बीघा कृषि भूमि पर विकसित की जा रहीं दो अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की। इसके अलावा सडक़ सीमा से अतिक्रमण हटाए। इसके अलावा चक गैटोर में सरकारी नाले की भूमि पर आ रहे अतिक्रमण बाउंड्रीवाल, लोहे का गेट, झाडिय़ां, मिट्टी की डोल भी हटाए।

पुलिस महानिरीक्षक राहुल कोटोकी ने बताया कि ग्राम रामसिंहपुरा, बैरवाओं की ढाणी में दो बीघा और इसके पास चार बीघा कृषि भूमि पर एक अन्य अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान मिट्टी-ग्रेवल की सडक़ें, भूखंडों की बाउंड्रीवाल को ध्वस्त कर दिया गया।

यहां भी चला पीला पंजा

  • सचिवालय नगर में सडक़ सीमा पर अतिक्रमण कर बनाईं गई बाउंड्रीवाल को ध्वस्त किया गया।
  • जेडीए की योजना रोहिणी नगर में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाया। यहां सीमेंट के ब्लॉक की चारदीवारी, पिलर आदि का निर्माण कर लिया गया था।
  • लालकोठी योजना के पास, विधानसभा के दक्षिण द्वार के मुख्य मार्ग पर सडक़ सीमा को अतिक्रमण से मुक्त कराया।

महाराजा-महारानी कॉलेज का स्वामित्व जेडीए-निगम को देने का विरोध

राजस्थान विश्वविद्यालय के महाराजा और महारानी कॉलेज का राजस्व रिकॉर्ड में स्वामित्व जयपुर विकास प्राधिकरण व नगर निगम की चर्चाएं जोरों पर चल रही है। इसको लेकर यूनिवर्सिटी के शिक्षक और पूर्व शिक्षकों की ओर से विरोध किया जा रहा है।राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी डॉ भूपेंद्र सिंह शेखावत ने इस संबंध में कुलपति को पत्र लिखा है। पत्र में विश्वविद्यालय सिंडिकेट की एक विशेष बैठक आयोजित कर इस संबंध में राजभवन व राजस्थान सरकार को विरोध स्वरूप एक प्रस्ताव पारित कर भेजे जाने की मांग की है।

उन्होंने बताया कि राजस्थान विश्वविद्यालय से जुड़ी किसी भी संपदा का स्थानांतरण किसी दूसरी संस्था को किए जाने से पूर्व विश्वविद्यालय सिंडिकेट की अनुमति अनिवार्य रूप से आवश्यक है। लेकिन इन दोनों महाविद्यालयों के स्वामित्व का हस्तांतरण जेडीए व नगर निगम को किए जाने से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को कोई जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रोफेसर सोमदेव ने विरोध किया है। इधर, इस मामले में जिला प्रशासन का कहना है कि इस तरह का विश्वविद्यालय से जुड़ी किसी भी संपदा का स्थानांतरण नहीं किया गया है।