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‘पद्मावत’ पर फिर से विवाद! अब इस सीन को बनाया जा रहा मुद्दा

फिल्म को सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद सार्वजनिक रूप से दिखाने का सर्टिफिकेट दिया गया है...

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जयपुर

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Dinesh Saini

Feb 20, 2018

padmavat

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जयपुर/नई दिल्ली। दिल्ली हाइकोर्ट ने उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया जिसमें आरोप लगाया गया है कि बॉलीवुड फिल्म ‘पद्मावत’ में सती प्रथा का महिमामंडन किया गया है और फिल्म के निर्माताओं-निर्देशक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है। एक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की बेंच ने कहा कि इसमें यह दिखाना होगा कि सती प्रथा के महिमामंडन के विचार को फिल्म के निर्माताओं और निर्देशकों ने जानबूझकर प्रचारित किया है। बेंच ने टिप्पणी की कि फिल्म में जो डिस्क्लेमर है उसके मुताबिक यह काल्पनिक कृति है और फिल्म के निर्माताओं या निर्देशक संजय लीला भंसाली की तरफ से इस प्रथा का प्रसार करने की कोई मंशा नहीं दिखाती है।

अदालत ने यह टिप्पणी सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश की जनहित याचिका पर सुनवाई करने के दौरान की। अग्निवेश ने याचिका में सती प्रथा का चित्रण करने वाले दृश्यों को हटाने की मांग की है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड की तरफ से उपस्थित वकील मनीष मोहन ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि फिल्म को सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद सार्वजनिक रूप से दिखाने का सर्टिफिकेट दिया गया है। बेंच ने कहा, सिर्फ इसलिए कि किसी ने किसी को कुछ चीज दिखाई, इसका मतलब यह नहीं कि यह प्रसार है।

गौरतलब है कि राजस्थान में राजपूतों के विरोध के चलते अभी तक फिल्म पद्मावत रिलीज नहीं हो पाई है। पद्मावत के विरोध की आग राजस्थान से उठकर पूरे देश में फैल गई थी जिसके बाद पूरे देश में राजपूत संगठनों द्वारा फिल्म का जोदार विरोध प्रदर्शन हुआ और फिल्म पर बैन लगाने की मांग उठी थी। संगठनों की मांग के अनुसार फिल्म का नाम पद्मावती से बदलकर पद्मावत कर दिया गया और कई सीन्स भी फिल्म से हटा दिए गए थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिल्म भारत में रिलीज हो पाई है। पद्मावत के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राजपूत समाज एवं संगठनों ने विरोध और तेज कर दिया था।

राजस्थान की महिलाओं के साहस की गाथा गाती है जौहर प्रथा
जौहर पुराने समय में राजपूत स्त्रियों द्वारा की जाने वाली प्रथा थी। जब युद्ध में हार निश्चित हो जाती थी तो पुरुष मृत्युपर्यन्त युद्ध हेतु तैयार होकर वीरगति प्राप्त करने निकल जाते थे तथा स्त्रियाँ जौहर कर लेती थीं अर्थात जौहर कुंड में आग लगाकर खुद भी उसमें कूद जाती थी। जौहर कर लेने का कारण युद्ध में हार होने पर शत्रु राजा द्वारा हरण किये जाने का भय होता था। जौहर क्रिया में राजपूत स्त्रियाँ जौहर कुंड को आग लगाकर उसमें स्वयं का बलिदान कर देती थी।