
बांटने से कम होता है दर्द
खामोशी से बचें
खामोशी दर्द को बढ़ाती है और व्यक्ति अंदर ही अंदर घुटन महसूस करता है। बेंसन हेनरी इंस्टीट्यूट फॉर माइंड बॉडी मेडिसिन की पेन मैनेजमेंट डायरेक्टर डॉ. एलेन स्लॉसबी का यह कहना है। वे कहती है, 'आमतौर पर पुरुष शारीरिक दर्द को चुपचाप सहते रहते हैं। वे अपने दर्द को बताने में झिाझकते हैं। ऐसे में वे इमोशनल डिस्ट्रेस के शिकार हो जाते हैं, जिससे उनकी समस्या और भी बढ़ जाती है। दर्द खुद तक ही सीमित रखने पर ये व्यक्ति को अधिक परेशान करने लगता है। दर्द बने रहने से व्यक्ति के दिलो-दिमाग पर इसका प्रभाव बना रहता है।
साझा करें
दर्द को बांटने से दर्द कम होता है। दर्द को अपने परिवार वालों और मित्रों के साथ शेयर किया जाना चाहिए। इसका एक फायदा तो यह होता है कि बांटने से दर्द कम होता है, दूसरा परिवार वालों और मित्रों की मदद मिलती है उस परेशानी को कम करने में। आपकी परेशानी का उन्हें पता होने पर आपको लेकर उनमें किसी तरह की गलतफहमियां नहीं पनपेंगी बल्कि वे आपके लिए मददगार साबित होंगे। इसलिए अगर आप किसी भी तरह के दर्द को लेकर परेशान हैं तो उसे अपनों से बांटिए। इसे अपने तक सीमित रखकर घुटिए मत।
मूवमेंट जरूरी है
दर्द में मूवमेंट बनाए रखना बहुत फायदेमंद होता है। दर्द की मानसिकता बनाकर बिस्तर पकड़े रहने से दर्द बढ़ता ही है। माना दर्द की वजह से आप कई काम नहीं कर पाते। इसके बावजूद जितना संभव हो मूवमेंट बनाए रखें। इस बात पर गौर करें कि आप क्या कर सकते हैं बजाय इस बात के कि आप क्या नहीं कर सकते। चाहे घर का काम हो या ऑफिस का। जहां जिस रूप में भी संभव हो मूवमेंट बनाए रखें। हां इसमें चिकित्सक की गाइडलाइन तो महत्वपूर्ण है कि किस तरह के मूवमेंट से बचना है, लेकिन दर्द को बहाना बनाकर बैठ जाने से दर्द बढ़ता ही है।
कामयाबी याद रखें
दर्द में खोए रहने से दर्द हमेें अधिक सालता है। वह हमारे दिलो-दिमाग पर हावी रहता है और हमें दुखी बनाए रखता है। दूसरी तरफ दर्द को दिमाग पर अधिक हावी न होने देेने से उसका प्रभाव कम हो जाता है। इसके लिए एक बेहतर तरीका है अपनी कामयाबी को याद करना। आप सोचें कि आपने पहले मुश्किलों में कैसे कामयाबी हासिल की। इसे याद करने पर आपका हौसला बढ़ेगा और आपको दर्द पर काबू पाने की ताकत मिलेगी।
सोच सकारात्मक
दर्द में अपनी सोच को सकारात्मक बनाए रखें और खुद पर नकारात्मकता को हावी न होने दें। सोचिए कि आप अपने दोस्त या परिजन को दुख-दर्द में किस तरह का सुझाव देते हैं। कैसे उसे परेशानी से उबारने का प्रयत्न करते हैं। ठीक वही कोशिश अपने लिए कीजिए। साथी को दी जाने वाली सलाह खुद पर लागू कीजिए बजाय दर्द की मानसिकता बनाए रखकर नकारात्मता को हावी होने देने के। खुद के बारे में सोचे और खुद को उबारें दर्द से।
Published on:
13 Sept 2019 01:09 pm
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