
जयपुर। फर्जी डिप्लोमा व डिग्रियों के माध्यम से पंचायतीराज विभाग में पांच साल से हजारों कनिष्ठ लिपिको ने नौकरियां कर सरकार को करोड़ों रुपए की चपत लगा दी। अब विभाग के लिए इन अभ्यर्थियों की नौकरी गले की फांस बन चुकी है। विभाग भी मामले को लेकर चुपी साधे बैठा है। जिला परिषदों के अधिकारी उच्च अधिकारी से मामले को लेकर दिशा-निर्देश मांग रहे हैं, लेकिन फर्जी अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने के कारण एवं अधिकारियों पर गाज गिरने की आशंका के चलते विभाग हाथ खींच रहा है।
बर्खास्त किए 18 कनिष्ठ लिपिक
जिला परिषद हनुमानगढ़ ने 13 सितम्बर 2017 को जिले की सात पंचायत समितियों मेंं चयनित एवं चार वर्र्ष से सेवारत अभ्यार्थियों को जांच के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
क्या है मामला
2013 में महानरेगा योजना में कार्यरत संविदा कार्मिको को नियमित नियुक्ति प्रदान करने के लिए पंचायती राज विभाग ने बोनस अंक देते हुए 19537 कनिष्ठ लिपिक पदों पर भर्ती निकाली थी। पद के लिए शैक्षणिक योग्यता के साथ यूजीसी की ओर से अधिकृत संस्थाओं से कम्प्यूटर डिग्री एवं डिप्लोमा होना आवश्यक था। राज्यों की सीमाओं से बाहर ऑफ कैम्पस स्टडी सेंटर के माध्यम से दिए गए डिग्री एवं डिप्लोमा चयन के लिए मान्य नहीं हैं, इसके बावजूद अधिकारियो ने अभ्यर्थियों का चयन कर लिया।
जांच करवाएंगे
- मामले को लेकर जांच की जाएगी। दस्तावेजों के परीक्षण के बाद कार्रवाई की जाएगी। विभाग को इस बारे मेंं दिशा निर्देश जारी करने को लेकर कहा जाएगा।
राजेन्द्र राठौड़, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री
वहीं इधर... 12वीं में फेल होने पर दी जान
जयपुर/बस्सी। बस्सी क्षेत्र के गुढ़ाचक निवासी छात्र ने फेल होने पर विषाक्त पदार्थ खाकर जान दे दी। छात्र रोहिताश मीणा (18) राजस्थान बोर्ड की 12वीं कक्षा में फेल होने पर अवसाद में था। शनिवार देर रात विषाक्त पदार्थ खाने से बिगड़ी तबीयत के बाद परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए, जहां रविवार सुबह 8 बजे दम तोड़ दिया। रोहिताश 2 साल से 12वीं कक्षा में फे ल हो रहा था।
इधर, विधाधर नगर क्षेत्र में शनिवार दोपहर घर पर अकेली किशोरी ने साड़ी का फंदा लगाआत्महत्या कर ली। परिजनों के आने के बाद घटना का पता चला तब पुलिस को सूचना दी गई।
Published on:
04 Jun 2018 10:24 am
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