जयपुर। पंडित झाबरमल्ल शर्मा स्मृति व्याख्यान एवं सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार समारोह सोमवार सुबह जयपुर में संपन्न हुआ। राजस्थान पत्रिका की ओर से आयोजित इस समारोह के
मुख्य वक्ता द ट्रिब्यून के एडिटर-इन-चीफ हरीश खरे रहे। वहीं अध्यक्षता एम्स जोधपुर के निदेशक प्रो. संजीव मिश्रा ने की।इस अवसर पर सृजनात्मक साहित्य व पत्रकारिता पुरस्कार दिए गए। पत्रिका समूह की टीम को पत्रकारिता की विभिन्न विधाओं में सर्वश्रेष्ठ कार्यों के लिए पुरस्कृत किया गया। सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार के तहत इस वर्ष कहानी में
पहला पुरस्कार जयपुर के कथाकार राजेन्द्र कुमार राज की कहानी '44-ए चौरंघी रोड' और
दूसरा पुरस्कार मेरठ के निर्मल गुप्त को उनकी कहानी 'टारगेेट' के लिए मिला।
कविता में
पहला पुरस्कार जयपुर की ही देवयानी भारद्वाज की कविता 'सब कुछ होता है सितंबर में' और
दूसरा पुरस्कार बहादुर पटेल की कविता 'खामोशी' के लिए दिया गया। ये पुरस्कार पत्रिका समूह के परिशिष्टों में वर्षभर में प्रकाशित कहानियों और कविताओं के लिए दिए जाते रहे हैं।
इस वर्ष कहानी और कविता के निर्णायक मंडल में रायपुर, छत्तीसगढ़ के कथाकार आनंद हर्षुल, अजमेर के कथाकार प्रफुल्ल प्रभाकर, जोधपुर के मुरलीधर वैष्णव, इंदौर के कवि आशुतोष दुबे, राजसमंद के कमर मेवाड़ी और अम्बिका दत्त शामिल थे।
इन श्रेणी में मिले पत्रकारिता पुरस्कारग्राफिक्स ले-आउट का सौभागमल जैन पुरस्कार, ओपिनियन के लिए कानमल ढढ्डा पुरस्कार, शाखा अभियान का कैलाश मिश्र पुरस्कार, एक्सक्लूसिव स्टोरी का पी.कु. नरेश पुरस्कार, ब्यूरो अभियान का शाहिद मिर्जा पुरस्कार, व्यंग्य चित्र का अनन्त कुशवाहा पुरस्कार तथा मानवीय स्टोरी का चन्द्रभान पुरस्कार सहित अन्य पुरस्कार भी दिए गए।
विजेताओं के बारे मेंहिन्दुस्तान कॉपर लि. कोलकाता में सहायक महाप्रबन्धक रह चुके राजेन्द्र कुमार राज की अब तक एक सौ बीस कहानियां विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। इनकी दो उपन्यास सहित मास कम्युनिकेशन और पब्लिक रिलेशन पर चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। 'हैल्थ' परिशिष्ट में प्रकाशित उनकी कहानी '44-ए, चौरंघी रोड' में बताया गया है कि स्त्री अपने बंधनों में अपने आप ही बंधी है। ये बंधन कृत्रिम हैं। पुरुष इस कृत्रिमता का लाभ उठाने का अवसर नहीं चूकता, पर स्त्री चाहे तो कोई नहीं रोक सकता।
हिंदी भाषा की सन्दर्भ व्यक्ति के रूप में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में कार्यरत देवयानी भारद्वाज के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और ब्लॉग इत्यादि में कविताओं का प्रकाशन व समय-समय पर समसामयिक मुद्दों पर अखबारों में लेख भी प्रकाशित होते रहे हैं। उनकी हमलोग परिशिष्ट में प्रकाशित पुरस्कृत कविता 'सब कुछ होता है सितंबर में' सितम्बर के महीने के साथ एक खास तरह के लगाव की कविता है, जो जीवन के प्रति, उसमें होने वाली घटनाओं के प्रति राग की कविता है तो कहीं उसकी विसंगतियों को दर्ज भी करने की कोशिश करती है।
कहानी में दूसरे स्थान पर चयनित निर्मल गुप्त के देश की प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में कहानी, कविता और व्यंग्य लेख प्रकाशित हो चुके हैं। कुछ कविताओं का आपने अंगे्रजी और क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया है। उनकी कहानी 'टारगेट' बाजारवाद की दुनिया के तीखे सच को उजागर करती प्रेम में आकंठ डूबे दो युवाओं के टारगेट बनने और न बनने के मध्य के द्वंद्व की भावपूर्ण गाथा है।
कविता का दूसरा पुरस्कार प्राप्त करने वाले शासकीय सेवा में कार्यरत देवास (मध्यप्रदेश) के बहादुर पटेल के दो कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इनकी कविताएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही है। दूसरे पुरस्कार के रूप में चयनित उनकी कविता 'खामोशी' प्रतिरोध की कविता है, जिसमें हमारे समय में जो चुप्पी है, उसे तोडऩे का आह्वान किया गया है। कार्यक्रम में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी और डिप्टी एडिटर भुवनेश जैन भी मौजूद थे।
ये रहे उपस्थितः कार्यक्रम में पूर्व मंत्री बृजकिशोर शर्मा, पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी, सूचना आयुक्त आशुतोष शर्मा, शहर काजी खालिद उस्मानी, कोटा विवि के पूर्व कुलपति प्रो बीएल शर्मा, जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक गुप्ता, मिर्जा गालिब सोसायटी के महासचिव मिर्जा हबीब बेग, पद्मश्री विजेता शाकिर अली और अर्जुन प्रजापति, उपमहापौर मनोज भारद्वाज, जयपुर दूरदर्शन के पूर्व निदेशक नंद भारद्वाज, पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल, अल्प संख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जसबीर सिंह, हरिदेव जोशी पत्रकारिता विवि के पूर्व कुलपति और पर्यावरणविद् हर्षवर्धन भी मौजूद थे।