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प्रदेश में पैंथरों की जान पर बनी, 6 साल में मारे गए 253 पैंथर

63 पैंथरों को वाहनों ने कुचला, 14 को लोगों ने मार डाला, आपसी टकराव में 31 ने गंवाई जान

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jaipur

प्रदेश में पैंथरों की जान पर बनी, 6 साल में मारे गए 253 पैंथर

जयपुर. राज्य में वाहनों की सरपट और लोगों का हमला पैंथरों की जान पर भारी पड़ रहा है। पिछले करीब 6 साल में 63 पैंथरों को सड़कों पर वाहनों ने कुचल दिया या पटरियों पर ट्रेन ने चपेट में ले लिया। इस अवधि में 14 पैंथरों को लोगों ने घेरकर मार डाला। वन्यजीव विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले लगभग 6 साल में 253 पैंथर मारे जा चुके हैं। कभी रास्ता भटकने तो कभी भूख-प्यास के कारण भोजन की तलाश में पैंथर आबादी क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। किसी जानवर का पीछा करते हुए घनी आबादी क्षेत्र या सड़क पर पहुंचकर मौत के शिकार हो रहे हैं।

सर्वाधिक हादसों में
पैंथरों की सर्वाधिक मौतें हादसों और दूसरे जानवरों के हमले में हो रही हैं। लोगों से इन्हें जान का खतरा डूंगरपुर, बांसवाड़ा, राजसमंद आदि क्षेत्रों में ज्यादा है। वहां आबादी क्षेत्रों का जुगलों से जुड़ाव और खुलापन होने के कारण ये आसानी से आबादी तक पहुंच जाते हैं। वहां कई बार लोग सुरक्षित पकडऩे की बजाय उन्हें मौत के घाट उतार रहे हैं। ग्रामीणों के हमले एवं हादसों में भी सर्वाधिक पैंथर इन्हीं क्षेत्रों में अधिक मारे गए हैं।

बाघ को मुकुंदरा भेजने पर अब 14 को सुनवाई
हाईकोर्ट ने टाइगर को मुकुंदरा हिल्स भेजने के मामले में सुनवाई 14 अगस्त तक टाल दी है। सुनवाई के दौरान मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक जी वी रेड्डी हाजिर हुए। न्यायाधीश के एस झवेरी और वी. के. व्यास की खण्डपीठ ने अजय शंकर दुबे व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। प्रार्थीपक्ष की ओर से कहा कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की अनुमति के बिना रणथणम्भौर से बाघ को मुकुंदरा हिल्स भेज दिया। अब दो बाघिन भी भेजी जा रही हैं। कोर्ट ने बाघिनों को भेजने पर रोक लगा दी है और सरकार का कहना है कि अनुमति की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। रेड्डी ने सुनवाई का आग्रह किया तो प्रार्थीपक्ष के वकील अनुराग कलावटिया ने भी सहमति दी।

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