18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पापा की प्रेरणा से मिली मंजिल

पापा से प्रोत्साहन मिला तो  मंजिल भी मिल गई। यह कहना है सिविल सर्विस परीक्षा 2014 में 216वीं रैंक पाने वाले मृदुलसिंह कच्छवाह का। दूसरे प्रयास में 216वीं रैंक पाने वाले मृदुल मूलरूप से गंगाशहर, बीकानेर के निवासी है। 

less than 1 minute read
Google source verification

image

Moti ram

Jul 05, 2015

पापा से प्रोत्साहन मिला तो मंजिल भी मिल गई। यह कहना है सिविल सर्विस परीक्षा 2014 में 216वीं रैंक पाने वाले मृदुलसिंह कच्छवाह का। दूसरे प्रयास में 216वीं रैंक पाने वाले मृदुल मूलरूप से गंगाशहर, बीकानेर के निवासी है।

उन्होंने पांचवीं तक की पढ़ाई बीकानेर में की। तत्पश्चात जयपुर के केन्द्रीय विद्यालय में अध्ययनरत रहे। कोचिंग के लिए उन्होंने दिल्ली को चुना। मृदुल के पिता गुलाबचंद ईएसआई दिल्ली में संयुक्त निदेशक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उसका एक भाई भी ईएसआई में कार्यरत है। घर में सरकारी सेवा का माहौल और पिता और भाई की प्रेरणा ने मृदुल को आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया।

मृदुल कहते हैं, पिता की प्रेरणा ही उनके लिए कामयाबी का रास्ता बनीं। कॉलेज शिक्षा के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि वे आईएएस की तैयारी करेंगे। मृदुल को सफलता तो पहले ही प्रयास में मिल गई, लेकिन निचले स्तर की सेवाओं में जाना उसको गवारा नहीं था। दिल्ली में उसने अपना अध्ययन जारी रखा। दूसरे प्रयास में उसे मंजिल मिल गई।