मृदुल कहते हैं, पिता की प्रेरणा ही उनके लिए कामयाबी का रास्ता बनीं। कॉलेज शिक्षा के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि वे आईएएस की तैयारी करेंगे। मृदुल को सफलता तो पहले ही प्रयास में मिल गई, लेकिन निचले स्तर की सेवाओं में जाना उसको गवारा नहीं था। दिल्ली में उसने अपना अध्ययन जारी रखा। दूसरे प्रयास में उसे मंजिल मिल गई।