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पेरेंट्स से क्या चाहते हैं टीचर

बच्चों को निखारने और संवारने में टीचर्स की बहुत बड़ी भूमिका होती है। समय-समय पर पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग के जरिए बच्चे को लेकर टीचर और पेरेंट डिस्कस करते हैं। इस औपचारिक मीटिंग के अलावा भी टीचर्स बच्चे के मामले में पेरेंट्स से कुछ उम्मीद रखते हैं। जानिए टीचर पेरेंट्स से किस तरह की अपेक्षाएं रखते हैं।

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पेरेंट्स से क्या चाहते हैं टीचर

पेरेंट्स से क्या चाहते हैं टीचर

मिलते रहें टीचर-पेरेंट्स
टीचर यह चाहते हैं कि बच्चों के माता-पिता उनसे संपर्क बनाए रखें और किसी भी तरह की जानकारी चाहने पर जरूर मिलें। टीचर-पेरेंट्स का जुड़ाव बच्चे के बेहतर विकास में सहायक होता है।

अनुशासन और प्रोत्साहन
पैरेंट्स को चाहिए कि वे घर पर बच्चों के लिए कुछ अनुशासन और नियम बनाए रखें। अच्छा करने पर उन्हें प्रोत्साहित करें। यह आदत बच्चे के स्कूल के माहौल को सपोर्ट करती है।

बच्चे की हो अपनी डायरी
टीचर चाहते हैं कि बच्चे की अपनी एक डायरी हो। उस डायरी में वह कोई स्कैच बना सकता है, फोटो संग्रह कर सकता है या फिर अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकता है।

अधिक छुट्टियां न हों
टीचर पेरेंट्स से उम्मीद करते हैं कि वे स्कूल के दिनों में बच्चे को लेकर लंबी छुट्टियों पर न जाएं। इससे बच्चे पर पढ़ाई का दबाव बन जाता है और टीचर को भी परेशानी होती है।

खेलना भी महत्वपूर्ण
अध्यापक मानते हैं कि बच्चे के लिए पढ़ाई जितना ही महत्वपूर्ण होता है खेलना। पेरेंट्स को भी इसे पॉजिटिव लेना चाहिए। खेल बच्चे के व्यक्तित्व निखारने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

मौजमस्ती नहीं चुनौती
टीचर्स कहते हैं कि हम छोटे बच्चों को पढ़ाते हैं तो पेरेंट्स यह न समझों कि हमारी नौकरियंा इन बच्चों के साथ बहुत मौजमस्ती वाली होती है। इन छोटे बच्चों को संभालना कम चुनौतीपूर्ण नहीं होता।

होमवर्क चेक करें
पेरेंट्स को चाहिए कि वे रोजाना बच्चे का होमवर्क जरूरी चेक करें। कई पेरेंट्स खुद अपने बच्चे का होमवर्क कर देते हैं। पेरेंट्स होम वर्क करने में उसकी मदद करें खुद होमवर्क न करें।

घर का माहौल आईना है
टीचर्स का मानना है कि वे हर एक बच्चे के व्यवहार और आदतों पर गौर करते हैं। उनकी ये आदतें बहुत कुछ उनके पारिवारिक माहौल और पेरेंट्स की सोच को दर्शा देती है।

मोबाइल का इस्तेमाल न करें
टीचर्स चाहते है कि स्कूल समय में बच्चा मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें और इस मामले में पेरेंट्स सहयोग दें। पेरेंट्स समझों कि मोबाइल के इस्तेमाल से बच्चा और क्लास डिस्टर्ब होती है।

कई भूमिकाओं में है
एक टीचर माता-पिता, दोस्त, सलाहकार, मनोवैज्ञानिक सहित कई भूमिका निभाता है। साथ ही वह बच्चे के घर के माहौल, लर्निंग डिसएबिलिटी, बुरी लत सहित कई मामलों से जूझाकर उन्हें संवारते हैं।

बढ़ाए बच्चों का हौसला
टीचर चाहते हैं कि पेरेंट्स सिर्फ बच्चे की पढ़ाई के मामले में स्कूल या टीचर पर ही पूरी तरह आश्रित नहीं रहें। पेरेंट्स को चाहिए कि वे पढ़ाई में बच्चों का हौसला बढ़ाते रहें।

शुक्रिया की उम्मीद
टीचर्स मानते हैं कि वे पेरेंट्स या स्टूडेंट्स से किसी बड़े उपहार की उम्मीद नहीं करते, पर वे चाहते हैं कि कोई उपहार कार्ड ऐसा जरूर हो जो उनके काम को सराहे या शुक्रिया लिखा हो।