
राइटिंग के फील्ड में धैर्य बहुत जरूरी है : सुदीप
जयपुर. जाने-माने यंग राइटर सुदीप नागरकर का मानना है कि राइटिंग के फील्ड में धैर्य की जरूरत है। जहां पढऩे वालों की डिमांड बढ़ी है, वहीं लिखने वाले का रेशो भी बढ़ा है। अब राइटिंग सेक्टर में पहले से ज्यादा चुनौतियां हैं। ऐसे में जो लोग राइटिंग में अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं, उन्हें लिखने से लेकर पब्लिशिंग तक में अपना धैर्य बनाए रखना चाहिए। बिड़ला सभागार में आयोजित एक इवेंट में शिरकत करने आए सुदीप का कहना है कि यंगस्टर्स आज के दौर में अपनी बुक पब्लिश करवाने के लिए इतने उत्साहित रहते हैं कि इस अतिउत्साह के चलते कई बार गलतियां कर बैठते हैं। यदि आप इस फील्ड में आए हैं तो सबसे जरूरी है कि अपना पैशेंस बनाए रखें। जब आप बुक पब्लिश करवाना चाहते हैं तो ऐसे पब्लिशर का चुनाव करें जो आपके कंटेंट की वैल्यू समझे। इसके अलावा अपनी कहानी (राइटिंग) को जल्दी पूरा करने के बजाय ज्यादा टाइम लें ताकि जब मार्केट में आपका कंटेंट आए तो लोग उसकी मजबूती समझ पाएं।
डायरी में लिखे पन्नों को नॉवेल में ढाला
बकौल सुदीप, मैं राइटिंग को लेकर काफी लम्बे समय से पैशनेट था। 2011 में डायरी लिखने से शुरुआत की, लेकिन मैंने कभी यह सोचकर नहीं लिखा था कि इसके जरिए इतना बड़ा मुकाम हासिल होगा, लेकिन एक दोस्त के बार-बार फोर्स करने पर मैंने डायरी में लिखे पन्नों को नॉवेल के रूप में ढाला।
रीडर्स से कनेक्टिविटी मेरी प्रायोरिटी
'फ्यू थिंग्स लेफ्ट अनसेड', 'दैट्स द वे वी मेट', 'इट स्टार्टेड विद् अ फ्रेंड रिक्वेस्ट', 'आॅल राइट रिजर्व्ड फॉर यू' सरीखी बुक लिखने वाले सुदीप कहते हैं, 'रोमांटिक जॉनर को ऑप्ट करने की सबसे बड़ी वजह रीडर्स से कनेक्ट होना है। मैंने अनुभव किया है कि लव और इमोशंस से जुड़ी मेरी कहानियों से लोग खुद को जोड़ पाते हैं। शायद इसकी वजह यह है कि लोग यह महसूस करते हैं कि उनकी लाइफ में भी ऐसे इंसिडेंट हुए हैं। वहीं मेरी कहानियों के पात्र भी मेरे आसपास के लोग ही होते हैं। मेरा फोकस हमेशा स्टोरीलाइन से ज्यादा अपना मैसेज कन्वे करना होता है। एलजीबीटी का फैसला अभी आया है, लेकिन मैंने 2016 में अपनी बुक के जरिए उनकी भावनाओं को समझाने की कोशिश की थी।'
फिल्म बने तो मेरा इन्वॉल्वमेंट जरूरी
दूसरे फेमस राइटर्स की तरह मेरे पास भी मेरी कहानियों पर आधारित फिल्म बनाने के ऑफर्स आए हैं, लेकिन मैं चाहता हूं कि मेरी स्टोरी पर यदि फिल्म बने तो स्क्रिप्ट में कोई बदलाव ना हो और मेरा इन्वॉल्वमेंट हो। इसी तरह जब मेरी बुक का ट्रांसलेशन होता है तो भी मैं अपना पूरा इन्वॉल्वमेंट रखता हूं। इसकी वजह बुक में सेम इमोशन बनाए रखना होता है।
Published on:
24 Sept 2018 12:52 am
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