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हिन्दू धर्म नहीं, इसे न जानने और न मानने वाले खतरे में हैं… : शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती

धर्म पर सवाल उठाने वाले लोग संस्कृत व्याकरण का अध्ययन करें।’ पुरी स्थित गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने धर्म, अध्यात्म और सनातन धर्म के दर्शन सहित विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर अपनी बात रखी।

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हर्षित जैन
‘हमें ज्यादा से ज्यादा सनातनी परंपरा का पालन कर लोगों के बीच इसका प्रचार भी करना होगा। भारत में निवास करने वाले सभी नागरिकों के पूर्वज हिंदू हैं व सनातन धर्म से पोषित हैं। धर्म पर सवाल उठाने वाले लोग संस्कृत व्याकरण का अध्ययन करें।’ पुरी स्थित गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने धर्म, अध्यात्म और सनातन धर्म के दर्शन सहित विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। करीब 60 वर्ष पूर्व की युवा पीढ़ी और दौर के साथ ही वर्तमान पीढ़ी में आए बदलावों पर भी बेबाकी से राय रखी।

धर्म पर सवाल उठाने वाले, संस्कृत व्याकरण का करें अध्ययन


सवाल- वर्तमान में धर्म के आधार पर राजनीति कितनी सही है?
जवाब- धर्मविहीन राजनीति संभव नहीं है। हालांकि आज की राजनीति दिशा हीन के साथ ही धर्म हीन होने से अपने उद्देश्य से दूर हो चुकी है। विश्व में कोई भी व्यक्ति धर्मनिरपेक्ष नहीं है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति भी भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की पक्षधर है। हिंदू खतरे में नहीं हैं। इस धर्म को न जानने और मानने वाले खतरे में हैं।

सवाल- आए दिन संविधान पर सवाल उठाने पर राय?
जवाब- ठीक ढंग से संविधान व्यवस्था का देश, काल और परिस्थिति के अनुसार अध्ययन करें। संविधान की आधारशिला ऐसी होनी चाहिए जिससे सबका हित हो। लेकिन आज कुछ लोगों द्वारा संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह गलत है। ऊंच-नीच पर कटाक्ष करना बंद होना चाहिए।

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वेदों का कराया जाए ज्ञान, गुरुकुल शिक्षा को मिले बढ़ावा


सवाल- डिजिटल दौर में युवा पीढ़ी को संस्कारों से कैसा जोड़ा जाए?
जवाब- आधुनिक शिक्षा बच्चों में संस्कार नहीं जगा पा रही है। वर्तमान शिक्षा नीति के कारण छात्र-छात्राओं में अच्छे विचारों का प्रवाह नहीं हो पा रहा है। गुरुकुल शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। माता—पिता के पास रहकर युवा उनसे कुछ सीखें। स्कूलों में वेदों की शिक्षा देनी चाहिए, जिससे बच्चों के जीवन शैली में सुधार आए। हर व्यक्ति का जीवन स्तर बदले।

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सवाल- चुनावी साल में राम मंदिर का मुद्दा छाया रहा। इस बारे में क्या राय है?
जवाब- सत्ता में कभी खुद को धर्म से ऊपर न रखें, इससे नुकसान ही हुआ। राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए सबकी राय लेनी चाहिए थी, सब जल्द बाजी में हुआ। धर्म का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। धर्म की सीमा का अतिक्रमण करके राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती है। दया, दान, सेवा और परोपकार ही धर्म है।

सवाल- 60 वर्ष पूर्व की पीढ़ी और आज की जनरेशन में आप क्या बदलाव देखते हैं?
जवाब- एक दौर में संस्कारों के साथ नैतिक गुणों और पारिवारिक मूल्यों को अपनाने पर जोर दिया जाता था। वर्तमान में युवा पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने के साथ ही नशे सहित अन्य बुराइयों में जकड़ा हुआ है। रही-सही कसर सोशल मीडिया पर मशहूर होने की होड़ ने पूरी कर दी है। सात्विक प्रवृत्ति रखें। धैर्य, दया व क्षमा जैसे गुणों को अपनाने की जरूरत है।