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पत्रिका जनादेश यात्रा…छुट्टी नहीं समझेंगे, मतदान प्रतिशत बढ़ाएंगे

पहले दिन राजधानी के छह विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे रथ, लोगों ने वोट करने की ली शपथ  

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मतदान प्रतिशत बढ़ाने और लोगों को मतदान के प्रति जागरुक करने के लिए राजस्थान पत्रिका के झालाना स्थित कार्यालय से बुधवार को पत्रिका जनादेश यात्रा की शुरुआत हुई। पहले दिन राजधानी के छह विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी रथ पहुंचे और इसमें मौजूद पत्रिका प्रतिनि धियों ने आमजन से संवाद किया उनकी समस्याओं को सुना और मतदान में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
इससे पहले पत्रिका कार्यालय से राजस्थान हाईकोर्ट के जज सुदेश बंसल और जिला निर्वाचन अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित ने जनादेश यात्रा के रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।


लोगों ने दिखाया उत्साह, ली मतदान करने की शपथ
– जनादेश यात्रा राजधानी के सिविल लाइन्स, आदर्श नगर, झोटवाड़ा, सांगानेर, विद्याधर नगर और बगरू विधानसभा क्षेत्र पहुंची। जनादेश यात्रा का लोगों ने उत्साह के साथ स्वागत किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को मतदान करने और दूसरों को प्रेरित करने की भी शपथ दिलाई।
-विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में लोगों ने स्थानीय समस्याओं पर चर्चा की। मूलभूत सुविधाएं न होने से लेकर बढ़ते अपराध पर लोगों ने अपनी राय रखी।


जरूर करें मतदान
मतदाता अपने मत के लिए स्वतंत्र है। वो जिस भी पक्ष को चुनना चाहते हैं, उसको चुनने का अधिकार है। यह अभियान मतदाताओं को जागरूक करेगा। मतदाता उससे प्रभावित न हों। अपने विवेक का इस्तेमाल कर मताधिकार का प्रयोग करें।
-सुदेश बंसल, जज, राजस्थान हाईकोर्ट

छुट्टी न समझें, जरूर करें वोट
जागरूकता के लिए पत्रिका का यह अच्छा प्रयास है। इससे मतदान प्रतिशत भी बढ़ेगा। मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करेंगे। शहरी वोटर ध्यान रखें। वोट करें, छुटï्टी का दिन न समझें।
-प्रकाश राजपुरोहित, जिला निर्वाचन अधिकारी

वोटर के मन में उत्साह

सराहनीय अभियान है। मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वोटर के मन में उत्साह है। ज्यादा से ज्यादा मतदान होगा तो अच्छी सरकार बनेगी।
-अभिषेक शर्मा, समाजसेवी

जन होगा जागरूक
इस यात्रा से जन जरूर जागरूक होगा। निर्णय तीन दिसम्बर तो पता लगेगा। मतदाता समझदार है। जाति, प्रलोभन और भावुक नहीं होता है। पत्रिका का सराहनीय प्रयास है।
-सम्पत सरल, कवि


जयपुर शहर में ये मुद्दे आए सामने
– खेलकूद के मैदानों की कमी
– चिकित्सीय सुविधाओं का अभाव
– मुख्य बाजारों में अव्यवस्थित ट्रैफिक
– पेयजल की किल्लत
– सीवर लाइन का इंताजार