
विश्व एड्स दिवस पर हुआ पत्रिका टॉक शो: RUHS मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने बताए एड्स से जुड़े मिथक और सच्चाई
जयपुर. आमतौर पर काफी लोग ये मान लेते हैं कि जो भी व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव है, उसने असुरक्षित यौन संबंध ही बनाए हैं, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है। एचआईवी पॉजिटिव का इस्तेमाल किया गया इंजेक्शन, उपकरण या संक्रमित का रक्त आदि भी एचआईवी पॉजिटिव होने का कारण हो सकते हैं। ये कहना है सीनियर डॉक्टरों का। जो गुरूवार को आरयूएचएस मेडिकल कॉलेज ( RUHS College of Medical Science ) में विश्व एड्स दिवस पर आयोजित पत्रिका टॉक शो में अपनी बात कह रहे थे। इस दौरान डॉक्टरों ने एड्स के इतिहास, लक्षण, कारण समेत एचआईवी से जुड़े मिथक और सच्चाई के बारे में भी विस्तार से बताया।
आरयूएचएस के मेडीसिन विभाग के एचओडी डॉ.प्रहलाद धाकड़ ने कहा कि एड्स को लेकर जागरूक होना बहुत जरूरी है। संक्रमित के साथ उठने-बैठने, भोजन करने, छूने आदि से एड्स नहीं फैलता। संक्रमित के खून और वीर्य के संपर्क में आने से फैलता है। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अलवर के प्रिंसिपल डॉ. लोकेन्द्र शर्मा ने कहा कि एड्स रोगियों के लिए वर्तमान में बेहतर दवाईयां आ चुकी हैं। यदि रोगी समय पर दवाएं ले और डॉक्टर की सलाह माने तो आम व्यक्ति की तरह खुशहाल जिंदगी जी सकता है।
एड्स पीड़ित की जानकारी रहती है गोपनीय
असिस्टेंट प्रोफेसर (पीएसएम) डॉ. अनामिका तौमर ने कहा कि एड्स रोगी की जांच और इलाज सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह फ्री होता है। टॉल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1097 पर एचआईवी से संबंधित सभी जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं। वहीं फार्माकोविजिलेंस सेंटर के कोऑर्डिनेटर सुशील कुमार ने कहा कि एड्स के इलाज के दौरान रोगी की सभी जानकारियां गोपनीयता रखी जाती हैं। ऐसे में इलाज कराने से बिल्कुल न कतराएं। उन्होंने कहा कि आमजन को भी एड्स रोगी को घृणित नजरों से नहीं देखना चाहिए। टॉक शो का संचालन शैलेन्द्र शर्मा ने किया।
Published on:
02 Dec 2022 04:19 pm
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