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चारागाह भूमि पर भी पट्टा देने पर उतारू राजस्थान सरकार!

चारागाह की जमीन को सिवायचक में बदल देंगे पट्टा

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चारागाह भूमि पर भी पट्टा देने पर उतारू राजस्थान सरकार!

चारागाह भूमि पर भी पट्टा देने पर उतारू राजस्थान सरकार!

भवनेश गुप्ता
जयपुर। सरकार की नजर अब चारागाह की जमीन पर भी टिक गई है। निकायों में चारागाह जमीन पर बसी कॉलोनियों में भी पट्टे देने की तैयारी है। इसके लिए विकास न्यास और निकायों के कानून में भी बदलाव कर रहे हैं। इसका तर्क है कि गांवों से निकायों मेें जो जमीन शामिल हुई हैं, उनमें चारागाह की भूमि भी है। शहरी क्षेत्र में आने और मौके पर आबादी बसने के बाद चारागाह किस्म का औचित्य नहीं रह गया। इसलिए भूमि की किस्म को चारागाह से बदलकर सिवायचक (गैर मुमकिन आबादी) करना चाह रहे हैं। ऐसा हुआ तो प्रदेश के निकायों में बड़ी संख्या में आबादी क्षेत्र में पट्टा बांटने की राह खुल जाएगी। अभी जयपुर,जोधपुर और अजमेर विकास प्राधिकरण में इसी नियमों के तहत कॉलोनी सृजित करने से लेकर नियमन तक की प्रक्रिया अपनाई गई है। इसी तर्ज पर नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग कानून में बदलाव का एजेंडा तैयार कर रहे हैं, जिसे स्वीकृति के लिए कैबिनेट में भेजेंगे। गौरतलब है कि प्रशासन शहरों के संग अभियान में सरकार 10 लाख पट्टे बांटना चाह रही है और इसी के तहत कई तरह की छूट देने में जुटे हैं।

यह दे रहे तर्क : गांवों की जमीन जब शहरी क्षेत्र में शामिल की गई तो उस समय नामांतरण खोला गया। इस दौरान चारागाह जमीन की किस्म नहीं बदली, केवल उसका खाता नम्बर बदला गया। जबकि, ऐसी भूमि की किस्म सिवायचक गैर मुमकिन दर्ज करनी थी। जब शहरी क्षेत्र में डेयरी की ही अनुमति नहीं है तो फिर चारागाह जमीन की जरूरत भी नहीं रहती। ग्रामीण इलाकों में किस्म नहीं बदली जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में रोक : सुप्रीम कोर्ट ने चारागाह जमीन पर योजनाएं सृजित नहीं करने के आदेश दे रखे हैं। इसके बावजूद प्रदेश में कई जगह ऐसी भूमि पर योजनाएं लाई गई हैं।

इस तरह भी बंटेगी पट्टों की रेवड़ी
1. पुरानी आबादी क्षेत्र में मौके के अनुसार हो रहे उपयोग के आधार पर ही पट्टे देना प्रस्तावित, इसमें आवासीय, व्यावसायिक उपयोग शामिल हैं।
2. निकायों द्वारा दिए जाने वाले पट्टे को बेचान एवं रहन (गिरवी) रखने की शर्त से मुक्त रखना। इससे लोगों को बैंक लोन लेने में आसानी होगी।
3. नगर पालिका अधिनियम के तहत जारी पट्टे फ्री होल्ड के आधार पर देना।
4. पूर्व राजपरिवार के स्वामित्व व मंदिर माफी की भूमि की बसी आबादी का नियमन। उस समय के पट्टे या मौके पर काबिज होने के वर्ष के आधार पर।
5. सरकारी भूमि पर विकसित आवासीय, व्यावसायिक क्षेत्रों का नियमन
6. कृषि भूमि पर बसी आवासीय योजनाओं का नियमन
7. अधिसूचित कच्ची बस्तियों के कब्जों का नियमन
8. स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत पट्टे जारी करना
9. खांचा भूमि का आवंटन
10. निकाय स्तर पर नीलाम, आवंटन किए गए भूखण्ड़ के बढ़े हुए क्षेत्रफल का नियमन
(सरकार प्रशासन शहरों के संग अभियान में इन कार्यों को भी शामिल कर रही है)