
पैदल चलने वालों की काटों भरी राह : 74 प्रतिशत सड़क पर फुटपाथ ही नहीं
जयपुर. सड़क पर चलने का पहला अधिकार राहगीर का है। दुनिया के कई देश इसीलिए राहगीरों की राह सुगम कर उन्हें सम्मान दे रहे हैं, लेकिन हमारे देश-प्रदेश में हालात इससे उलट हैं। राजस्थान में तो फुटपाथ को घटाकर या खत्म कर सड़कों को वाहन फ्रेंडली बनाने का काम चल रहा है। प्रदेश के शहरों में 74 प्रतिशत से ज्यादा सड़क पर फुटपाथ ही नहीं है और जहां हैं वहां भी 78 प्रतिशत हिस्सा आसानी से गुजरने लायक नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में यह आंकड़ा बढ़ गया है।
वाहन फ्रेंडली बनाने के लिए सड़कें चौड़ी की जा रही हैं। साइड इफेक्ट यह है कि राहगीरों की सड़क पर चलना मजबूरी बन गई और दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इसमें चारों स्मार्ट सिटी जयपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर के अलावा जोधपुर, अलवर, सीकर जैसे बड़े शहर भी शामिल हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से जारी सर्वे रिपोर्ट में परेशान करने वाले हालात सामने आए।यातायात-परिवहन स्टडी से जुड़ी रिपोर्ट में एक बार फिर परेशान करने वाले हालात सामने आए हैं।
7592 किलोमीटर में सर्वे
जयपुर सहित कुछ चिन्हित शहरों में 7592 किलोमीटर लम्बाई में सर्वे हुआ। इसमें सामने आया कि शहरी क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में चोटिल व मरने वालों में से 80 फीसदी से ज्यादा राहगीर हैं।
समझें : आंकडों में परेशान करने वाले हालात
(1) पुराने शहर में- 108 किलोमीटर
सड़क के दोनोें ओर-18.19 किलोमीटर-17 प्रतिशत
सड़क के एक ओर-5.4 किलोमीटर-5 प्रतिशत
वॉक-वे-17.28 किलोमीटर-16 प्रतिशत
उपलब्ध नहीं-66.96 किलोमीटर-62 प्रतिशत
(2) नगर निगम-परिषद क्षेत्र में- 2882 किलोमीटर
सड़क के दोनोें ओर-428.10 किलोमीटर-15 प्रतिशत
सड़क के एक ओर-114.16 किलोमीटर- 4 प्रतिशत
वॉक-वे-28.54 किलोमीटर-1 प्रतिशत
उपलब्ध नहीं-2311.74 किलोमीटर-81 प्रतिशत
(3) विकास प्राधिकरण-यूआईटी क्षेत्र में- 4602 किलोमीटर
सड़क के दोनोें ओर-506.22 किलोमीटर-11 प्रतिशत
सड़क के एक ओर-322.14 किलोमीटर-7 प्रतिशत
वॉक-वे-138 किलोमीटर-3 प्रतिशत
उपलब्ध नहीं-3635.5 किलोमीटर-79 प्रतिशत
फुटपाथ-सड़क पर पार्किंग
पुराने शहर में-80 प्रतिशत
नगर निगम-परिषद क्षेत्र में-62 प्रतिशत
विकास प्राधिकरण-यूआईटी क्षेत्र में-39 प्रतिशत
(चिन्हित सर्वे एरिया में)
यहां हो रहा वाहन फ्रेंडली काम
1. जयपुर : ट्रैफिक लाइट फ्री जंक्शन के लिए जयपुर शहर में करीब 700 करोड़ की लागत से फ्लाइओवर, ओवरब्रिज, अण्डरपास बनाए जा रहे हैं। जबकि राहगीरों के लिए ज्यादा कुछ नहीं।
2. कोटा : शहर को ट्रैफिक लाइट फ्री बनाने के लिए काम हुआ। करोड़ों की लागत से काम में राहगीरों की सुगम राह भूले।
नजीर : यहां राहगीरों के लिए बनाया इन्फ्रास्ट्रक्चर
-बगोटा, कोलंबिया : यहां सड़क के ही एक हिस्से में अलग लेन तैयार की गई। एक ही रूट पर 47 किलोमीटर लम्बाई में राहगीरों, साइकिल व बैटरी संचालित (नॉन मोटराइज्ड) वाहन के लिए डेडिकेटेड लेन बनाई गई।
-फिलाडेल्फिया, यूएस : पैदल चलने वालों को सड़क पर चलने में प्राथमिकता तय है। इसके बाद साइकिल सवारी को बढ़ावा दिया गया। साइकिल सवारी में 470 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
अभी यह हालात..
-सड़क पर राहगीरों का हिस्सा 16.06 प्रतिशत है
-साइकिल सवारी का ग्राफ 6.01 प्रतिशत ही रह गया
-बस और मिनी बस 18.49 प्रतिशत है
-कार, टैक्सी की सुविधा का हिस्सा 18.71 प्रतिशत है
-दोपहिया वाहन का 31.70 प्रतिशत है
-आॅटो रिक्शा 8.61 फीसदी हिस्सा है
-मेट्रो की 0.42 प्रतिशत सुविधा मिल रही है
(स्थिति शहरी इलाकों की है)
राज्य जिम्मेदारी : नगरीय निकाय, आरटीओ, ट्रेफिक पुलिस
केन्द्र जिम्मेदारी : आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्रालय
Published on:
27 Oct 2022 04:41 pm
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