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हाइटेंशन लाइनों के नजदीक बसे लोगों को बंधी पट्टा मिलने की उम्मीद

प्रदेश में बिजली की हाइटेंशन लाइनों के नजदीक लाखों लोग रह रहे हैं, जिन्हें पट्टों का इंतजार है। अब यह इंतजार खत्म हो सकती है। इन लोगों को सरकार पट्टों का तोहफा दे सकती है। यूडीएच स्तर पर मामले को लेकर मंथन किया जा रहा है।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Feb 09, 2023

हाइटेंशन लाइनों के नजदीक बसे लोगों को बंधी पट्टा मिलने की उम्मीद

हाइटेंशन लाइनों के नजदीक बसे लोगों को बंधी पट्टा मिलने की उम्मीद

जयपुर। प्रदेश में बिजली की हाइटेंशन लाइनों के नजदीक लाखों लोग रह रहे हैं, जिन्हें पट्टों का इंतजार है। अब यह इंतजार खत्म हो सकती है। इन लोगों को सरकार पट्टों का तोहफा दे सकती है। यूडीएच स्तर पर मामले को लेकर मंथन किया जा रहा है। दरअसल नगरीय विकास विभाग की ओर से 3 फरवरी 2015 को अधिसूचना जारी की गई थी, जिसके मुताबिक 132 केवी की हाईटेंशन लाइन के नीचे 105 फीट का राइट ऑफ वे छोड़ना जरूरी है। इसी तरह 220 केवी की हाईटेंशन लाइन के नीचे 120 फीट चौड़ा राइट ऑफ वे छोड़ना जरूरी है। अधिसूचना के मुताबिक निर्धारित राइट ऑफ वे छोड़कर ही भूखंडों का नियमन किया जा रहा है। इस वजह से प्रदेशभर में गृह निर्माण सहकारी समितियों की ओर से काटी गई कॉलोनियों में हाइटेंशन लाइन के नीचे बसे लोगों को पट्टा नहीं मिल पा रहा था। इसे लेकर जेडीए ने भी सरकार को प्रस्ताव भेजा है।

पृथ्वीराज नगर में 14 हाइटेंशन लाइन

जयपुर में भी पृथ्वीराज नगर योजना क्षेत्र में करीब बीस हजार परिवार इससे प्रभावित है। पृथ्वीराज नगर जन विकास समिति ने क्षेत्र के विधायक से लेकर सभी प्रमुख मंत्री, नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ज्ञापन दिए हैं। पृथ्वीराज नगर क्षेत्र में 14 हाईटेंशन लाइनें गुजर रही है। अगर सरकार राजी हुइ तो अकेले पृथ्वीराज नगर में 20 हजार लोगों को पट्टा मिल सकेगा।


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यूं निकाली जा सकती है गली

केन्द्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय की ओर से 16 जुलाई 2020 को सभी राज्यों को दिशा-निर्देश जारी किए गए है। इनमें हाईटेंशन लाइनों के नीचे राइट ऑफ वे की चौड़ाई निर्धारित की गई है। इन निर्देशों के अनुसार 132 केवी की हाईटेंशन लाइन के नीचे 19 मीटर चौड़ा राइट ऑफ वे और 220 केवी की हाईटेंशन लाइन के नीचे 25 मीटर चौड़ा राइट ऑफ वे बताया गया है। यह राइट ऑफ वे प्रदेश में लागू राइट ऑफ वे से कम है। इस पर जेडीए ने मार्गदर्शन मांगा है।