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पेट्रोल पंप स्वीकृति के लंबित प्रकरणों का निपटारा करने की कवायद

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मापदंडों की पालना के लिहाज से राज्य सरकार ने पेट्रोल पंप के निस्तारण के लिए नई प्रक्रिया शुरू की है। ताकि इन मापदंडों के तहत आने वाले प्रकरणों का जल्द निपटारा किया जा सके। इसके लिए सभी निकायों से यूडीएच ने लंबित प्रकरणों के संबंध में जानकारी मांगी है।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Jul 07, 2021

पेट्रोल पंप स्वीकृति के लंबित प्रकरणों का निपटारा करने की कवायद

पेट्रोल पंप स्वीकृति के लंबित प्रकरणों का निपटारा करने की कवायद

जयपुर।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मापदंडों की पालना के लिहाज से राज्य सरकार ने पेट्रोल पंप के निस्तारण के लिए नई प्रक्रिया शुरू की है। ताकि इन मापदंडों के तहत आने वाले प्रकरणों का जल्द निपटारा किया जा सके। इसके लिए सभी निकायों से यूडीएच ने लंबित प्रकरणों के संबंध में जानकारी मांगी है।

प्रमुख सचिव यूडीएच की अध्यक्षता में हाल ही स्टेट लैंड यूज चेंज कमेटी की बैठक में 50 से अधिक पेट्रोल पंप के लिए लैंड यूज चेंज के प्रकरणों पर विचार किया गया। एनबीटी ने देशभर में पेट्रोल पंप स्थापित करने को लेकर नए मापदंड जारी किए थे। राज्य सरकार ने पिछले महीने ही आदेश जारी कर इन मापदंडों को लागू किया है। स्टेट लैंड यूज चेंज कमेटी की बैठक में इन्हीं मापदंडों पर विचार किया गया। बैठक में इन प्रकरणों के निस्तारण के लिए संबंधित निकाय से हर प्रकरण की विस्तृत जानकारी मांगी गई है।

ये मांगी जानकारी

पेट्रोलियम कंपनी की ओर से जारी अनुमोदित मानचित्र में प्रस्तावित पेट्रोल पंप पर स्थापित वेंट पॉइंट, फिल प्वाइंट, डिस्पेंसिंग यूनिट व स्टोरेज टैंक की स्थिति का स्पष्ट अंकन करते हुए संबंधित वरिष्ठ नगर नियोजक की स्पष्ट टिप्पणी भिजवानी होगी। साथ ही इन पॉइंट्स के 50 मीटर की परिधि में मौके की स्थिति की सर्वे रिपोर्ट भेजनी होगी। सर्वे रिपोर्ट पर संबंधित निकाय के आयुक्त या अधिशासी अधिकारी, संबंधित वरिष्ठ नगर नियोजक या उनके प्रतिनिधि और आवेदक अथवा भूमि मालिक के हस्ताक्षर होने चाहिए। नगर नियोजन विभाग की ओर से यह समस्त जानकारी भिजवाने के लिए संबंधित विकास प्राधिकरण, नगर सुधार न्यास, नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के आयुक्त व अधिशासी अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। यह जानकारी निकायों से 10 दिन में मांगी गई है। इस जानकारी के आधार पर स्टेट लैंड यूज चेंज कमेटी यह फैसला कर सकेगी कि कौन से लंबित प्रकरण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मापदंड पर खरे उतरते हैं।