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जिस पर पानी की बर्बादी रोकने का जिम्मा वही कर रहा है प्रतिदिन 80 एमएलडी से ज्यादा महंगा पानी बर्बाद

सर्दी का दौर शुरू फिर भी शहर में बीसलपुर सिस्टम से प्रतिदिन 445 एमएलडी पानी की सप्लाईजबकि तापमान में बढ़ोतरी के हिसाब से बढाया जाता है बीसलपुर सिस्टम से पानीजलदाय इंजीनियर बोले—अब जरूरत सिर्फ 365 एमएलडी से भी कम पानी कीनवंबर से ही करनी थी जनवरी तक सिस्टम से पानी की कटौती

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 Water supply is not getting smooth due to lack of pump operator

Water supply is not getting smooth due to lack of pump operator


जयपुर।
जलदाय विभाग ही कर रहा बीसलपुर के महंगे पानी की बर्बादी
तापमान के आधार पर बीसलपुर सिस्टम से पानी की कटौती या बढ़ोतरी करने के नियम की पालना नहीं
सर्दी के मौसम में 365 एमएलडी पानी प्रतिदिन की जरूरत,लेकिन विभाग ले रहा है 445 एमएलडी प्रतिदिन

जयपुर। जलदाय विभाग पेयजल उपभोक्ताओं को बूंद बूंद पानी बचाने की नसीहत तो देता है लेकिन खुद इस सीख पर अमल करने से कोसों दूर बैठा है।
बीसलपुर से करोड़ों रुपए खर्च कर जयपुर लाए जा रहे महंगे पानी की बूंद—बूंद बचाने का जिम्मा जयपुर शहर जलदाय विभाग का है। लेकिन विभाग ही भरी सर्दी के नवंबर महीने में प्रतिदिन 80 एमएलडी से जयादा मंहगे पानी को आंख मूंद कर बर्बाद कर रहा है। इंजीनियर स्वीकार कर रहे हैं कि अब सर्दी के मौसम में उतने पानी की जरूरत नहीं है जितनी जरूरत मई—जून के महीने में होती है। लेकिन विभाग अब भी प्रतिदिन इन्हीं महीनों के हिसाब से सर्दी में बीसलपुर सिस्टम से धडाधड पानी खींचे जा रहा है। विभाग प्रतिदिन 445 एमएलडी पानी ले रहा हैं। जबकि अब सर्दी का मौसम शुरू हो गया है तो प्रतिदिन 390 एमएलडी पानी प्रतिदिन के लिए पर्याप्त हो सकता है।

तापमान के हिसाब से होती है कटौती—बढ़ोतरी
इंजीनियरों के अनुसार पानी की सप्लाई बढ़ाने या घटाने का फार्मूला तापमान के अनुसार होता है। अब जब नवंबर के महीने में दिन और रात का तापमान काफी गिर चुका है। ऐसे में मई जून के महीनों की जरूरत के बराबर पानी की जरूरत ही नहीं है। चौंकाने वाली बात यह भी है कि विभाग आखिर तापमान वाले फार्मूले पर अमल क्यों नहीं कर रहा है।

80 एमएलडी पानी की प्रतिदिन बर्बादी
प्रोजेक्ट के इंजीनियर तर्क दे रहे हैं कि नए इलाके बीसलपुर सिस्टम से जोड़े हैं। इसलिए सिस्टम से ज्यादा पानी लिया जा रहा है। लेकिन नए इलाकों में जल कनेक्शन ही जारी हो रहे हैं। इस स्थिति में 80 एमएलडी से ज्यादा पानी प्रतिदिन बर्बाद हो ही रहा है।


ऐसे हो रही है मंहगे पानी की बर्बादी
तापमान के हिसाब से बीसलपुर से पानी का उठाव नहीं
अब नवंबर से लेकर जनवरी तक पेयजल के उपभोग की जरूरतें लगातार कम हो रही है
शहर के कई इलाकों में पेयजल सप्लाई सुबह साढे चार बजे
पेयजल सप्लाई शुरू की जाती है लेकिन लोगों के नींद में होने के कारण टंकियां ओवर फ्लो होती रहती हैं
40 प्रतिशत पानी पहले ही लीकेज के जरिए होता
है बर्बाद

वर्जन
सर्दी के मौसम में पेयजल जरूरतें कम हो जाती हैं। सभी डिवीजन से डिमांड मंगा कर पानी की कटौती करेंगे।
सुभांशु दीक्षित
अधीक्षण अभियंता
बीसलपुर प्रोजेक्ट