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जयपुर-96 करोड़ की पेयजल परियोजनाएं, शिलान्यास के लिए जलदाय मंत्री की हां का इंतजार

कार्यादेश होने के बाद डेढ़ माह का समय निकला, धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ

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Problem of water supply, commissioner said, make arrangement for protection

Problem of water supply, commissioner said, make arrangement for protection

जयपुर.
जयपुर शहर में पेयजल समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में लगभग 96 करोड़ रुपए की पेयजल परियोजनाएं बनी हैं। दो परियोजनाएं तो ऐसी हैं जिनकी घोषणाएं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दो वर्ष पहले की थी। अब जब इन परियोजनाओं का धरातल पर काम शुरू करने का समय आया तो इंजीनियर और काम लेने वाली फर्म के कदम अचानक रुक गए। क्योंकि जलदाय मंत्री महेश जोशी इन परियोजनाओं का शिलान्यास करना चाहते हैं। लेकिन शिलान्यास का शेड्यूल मंत्री की ओर से तय नहीं किया गया है।

ये परियाजनाएं, इतनी आबादी होंगी लाभान्वित
लक्ष्मण डूंगरी-16 करोड़

बासबदनपुरा, दिल्ली रोड की 30 से ज्यादा कॉलोनियों की करीब 70 हजार की आबादी बीसलपुर के पानी से लाभान्वित होगी।
ट्रांसफर मैन परियोजना-66 करोड़

जेएलएन रोड़ से दिल्ली रोड न्यू फिल्टर प्लांट तक 18 किलोमीटर लंबी लाइन बिछेगी। पाइप भी मंगवाए जा चुके हैं। इस परियोजना से परकोटा क्षेत्र में 10 लाख की आबादी के लिए पेयजल व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही आमेर, जयसिंहपुरा खोर, ईदगाह, वनविहार, मंडी खटीकान, ट्रांसपोर्ट नगर, गोर्वधनपुरी क्षेत्र की एक लाख से ज्यादा की आबादी को बीसलपुर का पानी मिलेगा।
भटटा बस्ती और उद्योग नगर में पानी की टंकी-10 करोड़

दोनों परियोजनाओं से हजारों 20 हजार से ज्यादा की आबादी के लिए पर्याप्त दबाव से पेयजल उपलब्ध होगा।
एक वर्ष में पूरी होनी हैं चारों परियोजनाएं

इंजीनियरों के अनुसार चारों परियोजनाओं का काम एक वर्ष में पूरा होना है। ट्रांसफर मैन परियोजना और भट्टा बस्ती में पानी की टंकी निर्माण की घोषणा मुख्यमंत्री ने वर्ष 2020 में की थी। लक्ष्मण डूंगरी परियोजना और उद्योग नगर पेयजल परियोजना की घोषणा 2022 में की गई थी। अब कहा जा रहा है कि दोनों परियोजनाओं का काम नए वर्ष में ही शुरू हो सकेगा।
फिर समीक्षा किस बात की

जलदाय विभाग बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन के मामले में अन्य विभागों से फिसड्डी साबित हो रहा है। विभाग के एसीएस सुबोध अग्रवाल एक महीने में चार बार विभागीय कामकाज की समीक्षा करते हैं। जिसमें मुख्यमंत्री की बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन का बिंदु भी होता है। इसके बाद भी बजट में की गई पेयजल परियोजनाओं का काम धरातल पर नहीं दिख रहा है।


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