
बेजुबान पशुओं को पेयजल के लिए भटकता देख ग्रामीणों ने पानी से भर दी नाडी
जयपुर. प्रदेश में पाली, जालोर और सिरोही समेत दस जिले ऐसे हैं जहां प्रत्येक वर्ष गर्मियों में पीने के पानी के लिए हाहाकार मचता है। लेकिन PHED विभाग के मुख्य अभियंता (शहरी) इन जिलों में पेयजल समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाल सके। गर्मियों में पीने के पानी की किल्लत का शोर मचता है और फिर विभाग करोड़ों रुपए खर्च कर टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति कर चुप्पी साध लेता है। इस बार भी दस जिलों में आगामी गर्मियों में पेयजल संकट को देखते हुए जलदाय मंत्री महेश जोशी ने टैंकरों से जल परिवहन व्यवस्था करने के निर्देश इंजीनियरों को दिए हैं।
गर्मियों के बाद एसी कमरों में करते आराम
जलदाय विभाग के इंजीनियर्स की मानें तो पाली, जालोर, सिरोही, चूरू, बाडमेर, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर व डूंगरपुर को आपदा प्रबंधन विभाग ने सूखाग्रस्त घोषित किया है। विभाग इन जिलों में जलापूर्ति बहाल रखने के लिए जलदाय विभाग को संबधित जिलों के माध्यम से करोड़ों रुपए का बजट देता है। इंजीनियर्स के अनुसार गर्मियों में टैंकरों से जलापूर्ति जोर-शोर से की जाती है। गर्मियां निकलते ही इंजीनयर्स इस पेयजल किल्लत का स्थायी समाधान निकालने की जगह अपने एयर कंडीशंड कक्षों से बाहर ही नहीं निकलते।
कई जिलों में 10 वर्षों से चल रही वाटर ट्र्रेन
पाली, जालोर, सिरोही समेत कई जिलों में 10 वर्षों से वाटर ट्रेन चला कर पानी की किल्लत को दूर किया जाता है। लेकिन जब स्थायी समाधान की बात आती है तो इंजीनियर बगलें झांकने लगते हैं। जबकि शहरी क्षेत्राें में पेयजल समस्या के समाधान की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता शहरी के पर है। लेकिन वर्षों से इन जिलों में पेयजल समस्या जस की तस बनी हुई है।
टैंकरों से जलापूर्ति की जीपीएस से होगी मॉनिटरिंग
पीएचईडी मंत्री महेश जोशी ने बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग के नियमानुसार इन जिलों में तीन कूपन सिस्टम और जयपुर शहर की तर्ज पर टैंकर से जलापूर्ति के लिए टैंकर ट्रिप की जीसीएस और ओटीपी सिस्टम से मॉनिटरिंग होगी।
Published on:
29 Jan 2022 10:00 pm
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