
केस 1
ग्राम पंचायत एकां के मतदान केन्द्र संख्या 94 पर 122 नाम काटने के लिए बीएलए उम्मेदसिंह भाटी के नाम से आवेदन किया गया। जिसके बाद उम्मेदसिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर बताया कि उसकी ओर से कोई शिकायत नहीं की गई है। आवेदन पर हस्ताक्षर भी उसके नहीं है।
केस 2
पन्नासर के मतदान केन्द्र संख्या 219 पर किशनलाल सैन के नाम से शिकायत की गई। जबकि किशनलाल सैन ने बीएलओ को पत्र लिखकर बताया कि उसकी ओर से कोई आपत्ति दर्ज नहीं करवाई गई है और हस्ताक्षर फर्जी है एवं आपत्तियों से उसका कोई लेनादेना नहीं है। पन्नासर में 281 नाम काटने की आपत्ति दी गई है।
केस 3
धूड़सर गांव के मतदान केन्द्र संख्या 137 में बीएलओ को प्रारूप - 7 के 83 फार्म प्राप्त हुए। इसमें नामों को काटने के लिए आवेदन किया गया था। बीएलओ संतोषकुमार ने भौतिक सत्यापन किया तो सभी मतदाता जीवित व उपस्थित मिले। जिस पर उन्होंने आवेदनों को स्वीकार योग्य नहीं माना।
केस 4
जैसलमेर के सम क्षेत्र में रोजाणियों की बस्ती में बीएलए 2 चेतनसिंह की ओर से 3 प्रपत्रों में 29 मतदाताओं के नाम व इपिक नंबर देते हुए उनके नामों पर अलग-अलग आधार देते हुए आपत्ति जताई गई। ये सभी प्रपत्र गत 14 जनवरी को दिए गए। रोजाणियों की बस्ती के बीएलओ धन्नाराम ने बताया कि इन सभी नामों की जांच में वे सही पाए गए और कोई नाम नहीं काटा गया है।
प्रदेश में मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआइआर) चलाया जा रहा है। जिसके तहत पूर्व में प्रारूप प्रकाशन किया गया और नाम जुड़वाने, कटवाने, स्थानांतरित करने के लिए आपत्तियां आमंत्रित की गई थी। प्रदेश भर में नाम कटवाने को लेकर फर्जी शिकायतों के मामले सामने आए हैं। पोकरण विधानसभा क्षेत्र में भी 5 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम काटने को लेकर शिकायतें की गई है, जिसकी जांच भी की जा रही है। साथ ही शिकायतकर्ता व बीएलए की रिपोर्ट भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिसमें वे फर्जी साइन कर झूठी शिकायतें करने का दावा कर रहे है। इस संबंध में कांग्रेस की ओर से गत दिनों पोकरण में उपखंड अधिकारी व निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण पदाधिकारी को ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच करने की मांग की गई थी। ऐसे ही जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में 5-7 ग्राम पंचायतों में मतदाताओं के नाम काटने को लेकर शिकायतें किए जाने की जानकारी मिली है।
एसआइआर के प्रारूप प्रकाशन के बाद नाम कटवाने के लिए प्रपत्र-7 दिया जाता है। इसमें मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने पर आपत्ति जताई जाती है या नाम को हटाने के लिए भरा जाता है। प्रपत्र-7 केवल वही व्यक्ति दे सकता है, जिसका नाम उस निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है। साथ ही बीएलए-2 एक दिन में अधिकतम 10 आवेदन कर सकता है। इसके लिए शपथ पत्र भी देना पड़ता है।
पोकरण विधानसभा क्षेत्र में एक ही दिन में मतदान केन्द्रों पर बीएलओ को बड़ी तादाद में प्रपत्र-7 जमा करवाए गए है। इसका खुलासा तब हुआ, जब घंटियाली गांव में एक व्यक्ति के नाम से की गई शिकायत पर बीएलओ ने जांच शुरू की। जब शिकायतकर्ता से संपर्क किया तो उसने ऐसी किसी भी शिकायत से अनभिज्ञता जताई। जिसका ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ। इस संबंध में जब कांग्रेस नेताओं को जानकारी मिली तो उन्होंने अपने बीएलए से क्षेत्र में जांच के लिए कहा तो विधानसभा क्षेत्र में 5 हजार से अधिक ऐसे आवेदन मिले।
उपखंड स्तर पर अभी तक एक भी प्रपत्र-7 प्राप्त नहीं हुआ है। यदि बीएलओ स्तर पर कोई प्रपत्र-7 जमा हुए है तो उसकी जानकारी नहीं है। आशंका के आधार पर कांग्रेस की ओर से दिए गए ज्ञापन की जांच कर ली गई है।
Published on:
21 Jan 2026 11:45 pm
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