
दुनियाभर के मजदूरों को मजदूर दिवस की बधाई। हालांकि मजदूर दिवस ने देश में श्रमिकों को कई जगह संगठित किया लेकिन विडम्बना है कि अधिकांश क्षेत्र अभी असंगठित ही है।

देशभर में मजदूरों के हित की बात तो वर्षों से सरकारें करती आई है लेकिन धरातल पर सच्चाई यह है कि आज भी मजदूर को अगर महिला है

तो अपने बच्चे को धूप में सुलाकर किसी तरह दिनभर मजदूरी करके पेट भरने का जुगाड़ करना पड़ता है, और अगर पुरूष है तो दिनभर धूप या आंधी, बारिश हो या ओलावृष्टि खेतों या निर्माण ...

कार्य या फिर फैक्ट्रियों में जी—तोड़ मेहनत कर परिवार की गुजर—बसर के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कब आएंगे इनके अच्छे दिन।
