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भीलवाड़ा@पत्रिका. विशेष न्यायाधीश संख्या एक (पॉक्सो मामलात) देवेन्द्रसिंह नागर ने किशोरी का अपहरण व बलात्कार मामले में गवाही के लिए पेशी पर आने से बच रहे आसींद के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) रोहित मीणा की कार्यशैली पर सख्त नाराजगी जताई।
आठ बार बुलाने के बावजूद डीएसपी पेशी पर नहीं आए। यहां तक कि गवाही के लिए भेजे तामील वारंट तक को कोर्ट में पेश नहीं किया। डीएसपी के इस रवैये को कोर्ट ने गंभीर माना। अदालत ने डीएसपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। भीलवाड़ा एएसपी से तामील नहीं लौटाने पर सफाई मांगी। डीएसपी के खिलाफ जुर्माना लगाने के लिए अलग से पत्रावली खोली जाएगी। डीएसपी को 22 फरवरी को गिरफ्तार कर पेश करने के आदेश दिए हैं। मीणा अभी भरतपुर के नगर में पदस्थापित हैं।
डीएसपी थे आईओ:
27 सितम्बर 2020 को किशोरी ने बदनोर थाने में पॉक्सो में मामला दर्ज कराया। पीड़िता ने कहा, 9 सितम्बर को दूर का रिश्तेदार युवक घर से बहला-फुसला भीलवाड़ा ले गया। वहां से हरियाणा पहुंचे। उसने किराए के कमरे पर पीड़िता को बंधक बना बलात्कार किया। किशोरी के नहीं मिलने पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस बदनोर लाई। पीड़िता के बयान के आधार पर पॉक्सो में मामला दर्ज किया। पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर चालान पेश किया। इसमें अनुसंधान अधिकारी डीएसपी रोहित मीणा थे।
Published on:
15 Feb 2023 10:38 am
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