
कविता-कहते हैं लिखने से मन हल्का हो जाता है
ऋतु श्रीवास्तव
कहते हैं लिखने से मन हल्का हो जाता है।
यही जानकर और इसे सही मानकर
मेरा मन भी मचल जाता है, मुझे लिखने को उकसाता है
भरपूर जोर लगाता है
पर मेरी भी अजीब मनोदशा है
जब भी लिखने का जी करता है
जाने क्यों धुंधला दिखने लग जाता है
जिस कागज पर दिल का उबार उलेटना था
उस पर टप-टप पानी बरस आता है
हर जख्म हरा हो जाता है
मानो उनसे खून टपक हो आता है
और मेरा मन जाने कितने टन का हो जाता है।
तब वह स्वयं आश्चर्यचकित हो जाता है
और आत्ममंथन पर लग जाता है,
फिर कहीं जाकर उसे समझ आता है
कि जब कोई जख्म नासूर बन जाता है
तब कोई तरीका...कोई सलीका...कोइ जज्बात,
काम नहीं आता है
और उसे ठीक करना नामुमकिन बन जाता है
नामुमकिन बन जाता है।
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Published on:
10 Oct 2021 06:13 pm
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