
कविता-मातृभूमि तुम्हें नमन
शोभा रानी तिवारी
मातृभूमि तुम्हें नमन, यहां की माटी है चंदन,
ये हिंदुस्तान है मेरा,ये हिंदुस्तान है मेरा।
हमारे दिल की है धडकन, मां के चरणों में वंदन,
ये हिंदुस्तान है मेरा।
वंदे मातरम दिल की धड़कन, राष्ट्र की आराधना है,
ऊर्जा देने वाला गीत है, भारत मां की वंदना है,
कफन बांधकर निकले घर से, श्वास नहीं गिना करते,
देश की हिफाजत करना भी,
पूजा और अर्चना है तो तिरंगा कफन हमारा,
बस यही अरमान
ये हिन्दुस्तान है मेरा।
इस माटी में रास्ता बसता, त्याग और बलिदान,
इस माटी की देन हमारा,ऊंचा स्वाभिमान,
सत्यम, शिवम, सुंदरम सा है अपना ईमान,
विश्व पटल पर गूंजेगा भारत का जयगान,
मातृभूमि की रक्षा हित, वीरों ने किया बलिदान
ये हिंदुस्तान है मेरा।
त्याग तपस्या की भूमि, वीरभूमि कहलाती है,
शूरवीरता की गाथाएं,स्वयं वीरता गाती हैं,
रणबांकुरी वीरांगनाएं सर्वत्र पूजी जाती हैं,
वीरों की गौरव गाथा, सबको सुनाई जाती हैं,
अनेकता में एकता ही,है इसकी पहचान,
ये हिंदुस्तान है मेरा ।
मां के दामन पर कभी भी, दाग नहीं लगने देंगे,
जो बो गए मस्तक धरती पर, मान नहीं घटने देंगे
स्वतंत्रता की जोत जल रही, उसे नहीं बुझाने देंगे
मर भी जाएं तो ये तिरंगा, कभी नहीं झाुकने देंगे
मां के सिर का ताज तिरंगा,वीरों का सम्मान,
ये हिंदुस्तान है मेरा ये हिंदुस्तान है मेरा।
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Published on:
22 Jan 2022 03:24 pm
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