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अलग-अलग जातियों को साधने में जुटी गहलोत सरकार, नवगठित बोर्डों में जल्द होंगी राजनीतिक नियुक्तियां

ज्योतिबा राव फूले बोर्ड, राजस्थान चर्म शिल्प कला विकास बोर्ड और राजस्थान राज्य धोबी कल्याण बोर्ड के गठन को सरकार ने दी थी मंजूरी, दीपावली पर्व के बाद इन बोर्डों में जल्द ही नियुक्त होंगे चेयरमैन और सदस्य, विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मतदाताओं को लुभाने की कवायद

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cm ashok gehlot on ercp

cm ashok gehlot

जयपुर। प्रदेश में सवा साल के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर गहलोत सरकार अब अलग-अलग जातियों को भी साधने की कवायद में जुट गई है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में जिन तीन नवगठित बोर्ड के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है उनमें दीपावली पर्व के बाद राजनीतिक नियुक्तियां होंगी, जिसमें चेयरमैन के साथ-साथ सदस्य भी नियुक्त किया जाएंगे।

दरअसल गहलोत सरकार की ओर से शनिवार को ज्योतिबा राव फूले बोर्ड, राजस्थान चर्म शिल्प कला विकास बोर्ड, राजस्थान राज्य धोबी कल्याण बोर्ड के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। जिससे कि बोर्डों से संबंधित जातियों के लोगों को बेहतर तौर पर सामाजिक शैक्षणिक और कई तरह के योजनाओं का लाभ मिल सके।

इन जातियों का बड़ा वोटबैंक
दरअसल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से ज्योतिबा राव फुले बोर्ड, राजस्थान चर्म शिल्प कला विकास बोर्ड और राजस्थान धोबी कल्याण बोर्ड के गठन के पीछे जो वजह बताई जा रही है वो यह है कि इनसे जुड़ी जातियां खासतौर पर माली, सैनी, कुशवाहा, काछी, चर्मकार और धोबी जातियों का बड़ा वोट बैंक राजस्थान में है। ऐसे में सरकार की ओर से इन बोर्डों का गठन करके इन वर्गों से आने वाले मतदाताओं को साधने का प्रयास किया गया है।

मिलेगा राज्य मंत्री का दर्जा
नवगठित बोर्डों में जल्द ही राजनीतिक नियुक्तियां करके उनमें चेयरमैन को राज्यमंत्री का दर्जा देने की चर्चा भी चल पड़ी है, चर्चा यह भी है कि इन बोर्डों में अध्यक्ष- उपाध्यक्ष और सदस्य किसे बनाया जाए नामों की चर्चा भी उस स्तर पर चल रही है।

विप्र कल्याण बोर्ड का भी पहली बार किया था गठन
वहीं गहलोत सरकार की ओर से प्रदेश में विप्र कल्याण बोर्ड का भी पहली बार गठन किया गया था। विप्र कल्याण बोर्डका वादा गहलोत सरकार ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में किया था। विप्र कल्याण बोर्ड के जरिए भी गहलोत सरकार ने भी विप्र समाज के मतदाताओं को साधने का प्रयास किया था।

पहले ही होना चाहिए था गठन
गहलोत सरकार की ओर से विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भले जातियों को साधने के लिए तीन बोर्डों के गठन का फैसला लिया गया हो लेकिन इनसे जुड़े समाजों के नेताओं का कहना है कि सरकार को बोर्डों के गठन का फैासला पहले ही लेना चाहिए था क्योंकि अब विधानसभा चुनाव में 1 साल का समय बचा है। ऐसे में इन बोर्डों के गठन का लाभ समाजों को ज्यादा नहीं मिल पाएगा।

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