जयपुर। शहर के ऑक्सीजोन कहे जाने वाले पार्कों का बुरा हाल है। ग्रीनरी तो ठीकठाक है, लेकिन वॉक वे टूटे हैं और बिजली के खुले तार हादसों को आमंत्रण दे रहे हैं। ऐसे में सुबह जब लोग सैर करने जाते हैं तो खुली हवा में सांस लेने से पहले पार्क में फैली समस्याओं से परेशान होना पड़ता है।
जेडीए का ध्यान बड़े पार्कों पर रहता है। वहीं छोटे पार्कों को शहरी सरकार भी भूल गई है। निगम की शाखाओं में आपसी तालमेल न होने का खमियाजा शहर की लाखों आबादी उठा रही है।