अश्विनी भदौरिया .जयपुर. राजधानी में सड़कें बनाने और इनकी मरम्मत के नाम पर गड़बड़झाला चल रहा है। सावन में जो सड़कें बनी, उनमें से कई भादो में टूट गईं। वहीं, मरम्मत की गई सड़कों पर तो चलना मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं, जेडीए अभियांत्रिकी शाखा के अधिकारी सड़क बनाने वाले ठेकेदारों को बचा रहे हैं। इन ठेकेदारों ने पिछले तीन वर्ष में 1500 करोड़ रुपए से अधिक की सड़कें बनाई हैं, लेकिन अभियंताओं ने इनकी जानकारी साझा नहीं की।
ऐसे समझें सड़कों की कहानी
-पांच्यावाला में सड़कों का बुरा हाल है। ज्यादातर हिस्सा ग्रेटर नगर निगम के वार्ड 50 में आता है। ऐसे में लोग क्षेत्रीय पार्षद संजू चौधरी से कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
दरअसल, इस क्षेत्र में जेडीए को सड़क बनवानी है और जेडीए अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं। मीनावाला, कनक वृंदावन, सुखीजा विहार, बजरी मंडी रोड का बुरा हाल है।
-गोविंद मार्ग और जवाहर नगर बायपास से जोड़ने वाले सांई कॉलेज मार्ग पर यातायात का भारी दबाव रहता है, लेकिन पिछले कई माह से सड़क टूटी है। बारिश में तो बुरा हाल हो गया है।
-200 फुट बायपास की सर्विस रोड (चौराहा के पास) का निर्माण करीब एक माह पहले हुआ था। तीन दिन की बारिश ने सड़क निर्माण की पोल खोल दी। अनगिनत गड्ढे होने से वाहनों का निकालना मुश्किल हो गया है। सुबह पीक आवर्स में यहां जाम लग जाता है।
ऊपर से नीचे तक मिलीभगत
-जेडीए शहर में हर साल तकरीबन 500 करोड़ रुपए की सड़कें बनवाता है। वर्ष 2021 के बाद जेडीए ने सड़कों की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करना बंद कर दिया। ऐसा कर अभियांत्रिकी शाखा के अभियंता व ठेकेदारों की गड़बड़ी को छुपाया जा रहा है। इसमें ऊपर से नीचे तक मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
– कुछ जोन ने तो 2016 में बनी सड़कों की सूची वेबसाइट पर डाल रखी है। जबकि, इन सड़कों का डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (दोष दायित्व अवधि) भी पूरा हो चुका है।
ये है नियम
1-जिस सड़क का निर्माण किया जा रहा है, मौके पर बोर्ड लगाकर उस पर सड़क की लम्बाई से लेकर बजट, काम शुरू करने से खत्म करने की तिथि, विभागीय अधिकारी और ठेकेदार का नम्बर अंकित करना होता है।
हो रहा ये: चुनिंदा सड़कों को बनाते समय इस नियम की पालना की जा रही है।
2-वेबसाइट पर सड़क निर्माण पूरा होने की अवधि, डीएलपी की तिथि, सड़क की जानकारी से लेकर संबंधित ठेकेदार, एक्सईएन और जेईएन का मोबाइल नम्बर अंकित करना होता है, ताकि सड़क खराब होने की स्थिति में लोग सीधे संबंधित व्यक्ति को फोन कर सकें।
हो रहा ये: सूची अपडेट न होने की वजह से लोगों को पता ही नहीं चल पाता कि सड़क किसने बनाई है। बिना डीएलपी खत्म हुए जेडीए के अभियंता सड़क का दुबारा निर्माण करवा देते हैं।
ये जिम्मेदार
-अशोक चौधरी, अजय गर्ग, देवेंद्र गुप्ता और मनोज सोनी (सभी निदेशक अभियांत्रिकी शाखा, जेडीए)
-जोन एक्सईएन, एईएन और जेईएन भी जिम्मेदार हैं।