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POSCAST : रीत रही मां की संवेदनशीलता

जिस अन्न ने शरीर का निर्माण किया, वह मां का शरीर था। उसी से पोषित भी होना था

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Gulab Kothari Article : रीत रही मां की संवेदनशीलता : शिक्षा ने मनुष्य को अपने बारे में इतना अधिक जागरूक कर दिया कि उसके जीवन से दूसरे बाहर होते ही चले गए। प्रसाधन-टीवी-फोन ने व्यक्ति को और समेट दिया। इसी कारण व्यक्ति के चारों ओर दु:ख भी सिमट गया। दो बड़े सुख कहलाए आज घर में। एक रसोई से दूरी का वातावरण, नए व्यंजनों का जीवन में प्रवेश और रोगों का आक्रमण।