
Pradosh Vrat 2020 Puja Date Time Trayodashi Vrat Calendar 2020
जयपुर. माह की द्वादशी-त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस व्रत में भगवान शिव के साथ शिव परिवार यानि माता पार्वती, गणेशजी और कार्तिकेयजी की पूजा भी की जाती है। प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल अर्थात रात में शिवपूजा करना चाहिए। इस दिन व्रत और पूजा-पाठ करने से शिवजी प्रसन्न होते हैं. उनकी आशीर्वाद से सभी सुखों की प्राप्ति होती है। जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन आता है तब उसे शनि प्रदोष कहा जाता है. यह दिन शनि प्रकोप को कम करने के लिए सबसे अच्छा अवसर माना जाता है।
इस दिन पूरी श्रद्धा से शनि देव की उपासना करने से शनिजनित कष्ट और परेशानियां निश्चित ही कम होते हैं। शनि की महादशा, अंतरदशा, शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही हो तो उनके कारण मिल रहे दुख कुछ कम हो जाते हैं। यह बात हमेशा याद रखें कि शनि साढ़ेसाती, महादशा-अंतरदशा या ढैया आदि के दौरान हमें अपने कर्माें का फल ही प्राप्त होता है। सबसे खास बात यह है कि इस अवधि में पूजा-पाठ आदि से कष्ट कम ही हो सकते हैं, उनसे पूरी तरह मुक्ति नहीं मिलती।
शनिदेव जल्द ही प्रसन्न होनेवाले देवता नहीं हैं, उनके प्रकोप से राहत पाने के लिए लगातार और लंबे समय तक प्रयास करने होते हैं. शनि प्रदोष के दिन शनि के उपाय जल्द फलीभूत होते हैं इसलिए पूजा-पाठ, मंत्र जाप आदि जरूर करने चाहिए। इस दिन प्रदोष काल अर्थात संध्या के समय जब सूर्य अस्त हो रहा हो तब पहले शिवजी की पूजा करें. मान्यता है कि प्रदोष काल में शिवलिंग पर साक्षात शिवजी अवतरित होते हैं इसीलिए शिव पूजन का उत्तम फल मिलता है। माता पार्वती, कार्तिकेयजी और गणेशजी की भी करें।
इसके बाद शनिदेव की पूजा करें. दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करें, इससे शनि के अशुभ प्रभाव से मिलने वाले बुरे फलों में कमी आती है। इसके अलावा शनि संबंधित दोषों से मुक्ति के लिए इस दिन शनि चालीसा, शनैश्चरस्तवराज का पाठ कर सकते हैं। पिप्पलाद ऋषि कृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से शनि की शनि की साढ़ेसाती के कारण आ रही समस्याओं से निजात मिलती है। इस दिन शिव चालीसा, प्रदोष स्तोत्र का पाठ करें और प्रदोष व्रत कथा सुने और सुनाएं. शिवजी की आरती करें और मंत्रों का जाप करें।
Published on:
11 Dec 2020 07:24 pm
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