2 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

निजी स्कूलों की मनमानी, अभिभावकों के जेब पर भारी; नया कवर लगाकर बेच रहे पुरानी किताबें

Jaipur News: जयपुर के निजी स्कूलों में हर साल किताबें बदलने और कमीशन के खेल से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। पढ़िए पूरी खबर।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Himesh Rana

Mar 31, 2026

फोटो- AI

Jaipur News: नए सत्र में निजी स्कूलों की ओर से हर साल किताबें बदलने से अभिभावक परेशान है। शहर के कई निजी स्कूलों में किताबों को लेकर 'कमीशन गेम' चल रहा है। कोर्स में बदलाव न होने के बावजूद अधिक कमीशन देने वाले प्रकाशकों की किताबें लागू की जाती है।

केवल कवर और कीमत बदलकर नई किताबें खरीदने को मजबूर किया जाता है, जिससे अभिभावकों पर हर साल 8-10 हजार रुपए का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इस वजह से कहीं अभिभावकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की है। अभिभावक इसे लेकर परेशान भी रहे हैं।

ये भी समझिए, क्या है स्थिति

  1. 50 से अधिक बड़े स्कूल हैं जयपुर शहर में सीबीएसई के।
  2. 7 से 10 हजार रुपए तक किताब का सेट दिया जा रहा है।
  3. 20,000 हजार तक भार पड़ रहा है दो बच्चे होने पर।
  4. 8वीं तक की पुस्तक अपने हिसाब से लागू करते हैं।

स्कूल बुक बैंक शुरू हो तो मिलेगी राहत

इस समस्या के समाधान के लिए अभिभावकों ने छोटे समूह बनाकर बुकबैंक शुरू की है। इसके अलावा शहर में स्कूलों की ओर से बड़े स्तर पर बुकबैंक शुरू करने की जरूरत है। कुछ स्कूल भी छोटे स्तर पर यह योजना चला रहे हैं। ऐसे में सरकार और इसका फायदा यह होगा कि पुरानी कक्षा की किताब विद्यार्थियों से वापस ली जा सकेगी और अगली कक्षा की किताब उन्हें निःशुल्क मिलेंगी।

ऐसे समझें अभिभावकों की पीड़ा

मानसरोवर निवासी अभिषेक शर्मा ने बताया कि निजी स्कूल की ओर से दबाव बनाया जा रहा है कि स्कूल से ही नई किताब खरीदी जाएं। उनके कहे अनुसार पिछले साल पुरानी किताब खरीदी थी। लेकिन इस बार निर्देश दिए गए हैं कि पुरानी किताबें नहीं चलेंगी।

वैशाली नगर निवासी रवि कोटिया ने बताया कि बेटे के स्कूल से निर्देश मिले हैं कि निर्धारित दुकान से ही किताबें ली जाएं। उन्होंने बताया कि बाजार में दूसरी दुकानों पर किताबें नहीं मिली। ऐसे मैं अब स्कूल की दुकान से ही पुस्तक खरीदने की मजबूरी हैं।

नियम विरुद्ध खोले जा रहे काउंटर

स्कूलों की ओर से परिसर में ही किताबों के काउंटर खोल दिए जाते हैं। बाजार से खरीदने पर किताब को मान्य नहीं किया जाता। रेट भी बाजार रेट से अधिक वसूली जाती है। खास बात है कि शिक्षा विभाग और सीबीएसई ने स्कूलों में ऐसे काउंटर खोलने पर रोक लगा रखी है। इसके बाद भी विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता।