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RAILGUN: DRDO ने तैयार किया वज्र, 200 किमी तक ​बिजली से मरेंगे दुश्मन

India's First Electro magnetic Weapon: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन DRDO ने एक ऐसा हथियार तैयार किया है जो बिना बारूद के ही दुश्मन के सीमा में 200 किलोमीटर घुसकर पूरी तरह से भष्म कर देगा। यह इंद्र के वज्र की तरह इतनी बिजली पैदा करेगा कि दुश्मन का कोई भी ठिकाना पलक झपकते बर्बाद हो जाएगा। भविष्य की सुरक्षा तैयारियों के तहत भारत ऐसा घातक हथियार तैयार किया है जोकि दुश्मनों के लिए काल होगा।

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India's First Electro magnetic Weapon: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन DRDO ने एक ऐसा हथियार तैयार किया है जो बिना बारूद के ही दुश्मन के सीमा में 200 किलोमीटर घुसकर पूरी तरह से भष्म कर देगा। यह इंद्र के वज्र की तरह इतनी बिजली पैदा करेगा कि दुश्मन का कोई भी ठिकाना पलक झपकते बर्बाद हो जाएगा। भविष्य की सुरक्षा तैयारियों के तहत भारत ऐसा घातक हथियार तैयार किया है जोकि दुश्मनों के लिए काल होगा।

DRDOने इसका नाम रेलगन रखा है। यह 200 किलोमीटर दूर लक्ष्य को ध्वस्त कर सकता है। इसमें बारूद का इस्तेमाल नहीं होगा। महज एक इलेक्ट्रिक करंट से इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड (चुंबकीय क्षेत्र) तैयार होता है। इससे फिर बिजली के गोले बरसाए जाएंगे। इन गोलों की रफ्तार ध्वनि से छह-सात गुना ज्यादा होगी। तीनों सेनाएं दुश्मन के लडा़कू-टोही विमान,मिसाइल, जंगी जहाज, तोप और जमीनी ठिकानों को बर्बाद करने में कर सकती हैं।

अमरीका, रूस और चीन पीछे
DRDO की पुणे स्थित प्रयोगशाला आर्मामेंट रिसर्च एंड डवलपमेंट इस्टब्लिशमेंट ARDE इस हथियार प्रणाली को तैयार किया है। अभी ऐसा हथियार दुनिया में किसी भी देश के पास नहीं है। अमरीका, रूस और चीन इसे बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

तोप से तीन गुना ज्यादा मारक
तोप की रेंज 50 से 60 किमी होती है,वहीं रेल गन 200 किमी तक मार कर सकती है। इसमें बारूद का इस्तेमाल नहीं होगा, इसलिए लागत कम होगी। यह भविष्य का हथियार है। 10 एमजे कैपेसिटर गन का सफल परीक्षण हो चुका है। एआरडीई अब 100 एमजी क्षमता की रेलगन बना रही है।

अमरीका के पास भी नहीं है तकनीक
डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक डॉ.रवि गुप्ता ने दावा किया कि यह घातक हथियार दुनिया में किसी भी देश के पास नहीं है। चीन और अमरीका इसकी प्रणाली पर काम कर रहे हैं। डीआरडीओ ने इसकी थोड़ी जानकारी दी है। रेलगन भारत के लिए बहुद्देशीय साबित होगी। इससे हवाई, जमीनी और पानी का रास्ते होने वाले हमले रोके जा सकते हैं।

ये खासियत