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चूहों से अटा रेलवे स्टेशन, रोकथाम के इंतजाम के बावजूद हालात जस के तस

रेल पटरी के नीचे खुदे चूहों के बिल...प्लेटफार्म पर जगह-जगह नजर आते चूहों के बिल...पूरा जोधपुर रेलवे स्टेशन चूहों से अटा नजर आता है।

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avanish kr upadhyay

Dec 01, 2015

रेल पटरी के नीचे खुदे चूहों के बिल...प्लेटफार्म पर जगह-जगह नजर आते चूहों के बिल...पूरा जोधपुर रेलवे स्टेशन चूहों से अटा नजर आता है। करीब एक साल पहले एसी कोच कीएक महिला यात्री को चूहे द्वारा काटने के घटना के बाद मण्डल रेलवे जोधपुर ने चूहों से निजात पाने के प्रयास शुरू किए लेकिन ये सभी प्रयास औपचारिकता बनकर रह गए।

काजरी ने भी रेलवे को चूहों से निजात दिलाने की योजना तैयार कर के दी लेकिन एक साल बाद भी जोधुपर स्टेशन पर हालात जस के तस बने हुए हैं। हालांकि ट्रेनों के कोचों में चूहों को रोकने के लिए जोधपुर रेलवे कार्यशाला की ओर से ट्रेनों के कोचों में 1 लाख, 81,656 की लागत से पेस्ट कंट्रोल का कार्य किया जाएगा।

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पटरी व प्लेटफार्म पर बना रखे हैं बिल
जोधपुर रेलवे स्टेशन के पांच नम्बर रेल लाइन के नीचे तो चूहों के दर्जनों बिल नजर आ जाते हैं। प्लेटफार्म पर चूहों के झुण्ड के झुण्ड नजर आ जाते हैं। जनवरी 2015 में रेलवे प्रशासन ने पांच नम्बर रेल पटरी के नीचे बने चूहों के बिलों में कैमिकल डालकर रोकथाम के प्रयास किए जो कि नाकाफी साबित हुए।

पूरी तरह से लागू नहीं हो पाई योजना
जनवरी 2015 में तत्कालीन मण्डल रेल प्रबंधक राजीव शर्मा के समय रेलवे स्टेशन पर चूहों को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न चूहा नियंत्रण जोन तैयार किए गए। इसके तहत जोन सुपरवाइजर द्वारा अपने क्षेत्रों का ध्यान रखना था।

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सुपरवाइजर के निर्देशन में चूहों के बिल बन्द करना, उन्हें पिजंरों या चिपकाने वाले पैड पर पकडऩा, खाने-पीने की चीजें उपलब्ध नहीं होने देना और उनको स्टेशन से हटाने का कार्य करना था लेकिन हकीकत में यह कार्ययोजना नियमित रूप से लागू नहीं हो पाई।

चूहे ने एसी कोच में महिला यात्री को काट लिया था
28 दिसम्बर 2014 को सूर्यनगरी एक्सप्रेस में बांद्रा टर्मिनस से अपने परिवार के साथ यात्रा शुरू करने वाली महिला यात्री किरण को एसी कोच में चूहे ने काट लिया था। किरण बी1 कोच की 12 नम्बर सीट पर बैठी थी।

ट्रेन सूरत स्टेशन से जैसे ही रवाना हुई तभी किरण के अंगूठे को एक चूहे ने काट लिया। अंगूठे में चूहे के दांत इस कदर फंस गए कि चूहा मरने के बाद ही उसे अंगूठे से अलग किया जा सका। इस सम्बंध में रेलवे को शिकायत की , जिसके बाद चूहों को नियंत्रित करने के उपाय किए गए जो कि नाकाफी साबित हुए।