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बारिश से सड़कें व गलियां जलमग्न

बीकानेर जिले के अधिकांश क्षेत्र में शनिवार रात से लेकर रविवार की शाम तक बारिश हुई। बीकानेर शहर में मौसम विभाग ने शनिवार रात से लेकर रविवार शाम तक कुल 31 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की है। 

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Moti ram

Mar 02, 2015

बीकानेर जिले के अधिकांश क्षेत्र में शनिवार रात से लेकर रविवार की शाम तक बारिश हुई। बीकानेर शहर में मौसम विभाग ने शनिवार रात से लेकर रविवार शाम तक कुल 31 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की है।

बीकानेर शहर में शनिवार की रात ठहर-ठहर कर तथा रविवार की शाम चार बजे बाद करीब पन्द्रह मिनट तक हुई तेज बारिश ने कई जगहों पर सड़कों को पानी से भर दिया। वहीं ग्रामीण अंचलों में भी अच्छी बरसात हुई तथा कई जगह चने के आकार के ओले भी गिरे।

शहर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग भी इससे अछूते नहीं रहे। लूणकरणसर, गजनेर, देशनोक तथा श्रीडूंगरगढृ की ओर से जाने वाले सभी मार्गों पर जगह-जगह पानी भर गया। वहीं अंदरुनी क्षेत्रों पुरानी गिन्नाणी, इंदिरा कॉलोनी, सुभाषपुरा, नगर निगम रोड सहित विभिन्न जगहों पर पानी भर गया। निचले इलाकों के घरों में भी पानी घुस गया।

रविवार के पूरे दिन सूरज बादलों में छिपा रहा। साढ़े पांच बजे चली हवाओं के बाद कुछ बादल छंटे और धूप निकली। इससे दिन के अधिकतम तापमान में रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को दिन के अधिकतम तापमान में 8.9 डिग्री की गिरावट आई। रविवार को सुबह का न्यूनतम तापमान 13.1 व दिन का अधिकतम तापमान 17.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

डेढ़ दर्जन भेड़ मरी
राववाला में वर्षा ने कहर ढहाया। करीब डेढ़ दर्जन भेड़ों की मौत हो गई और बारिश का दौर रविवार शाम तक जारी रहा। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. ओ.पी. किलनिया खुद राववाला पहुंचे। बारिश से राववाला निवासी मानाराम नायक की डेढ़ दर्जन भेड़ो की मौत हो गई।

डाक्टरों की टीम पहुँचते ही भेड़ों के इलाज में जुट गई है। बीकमपुर से डाक्टर दीवान सिंह, गजनेर से डॉक्टर धारणिया व राववाला से डाक्टर केरीसिह भेड़ों के इलाज में जुट गए हैं। डॉक्टर किलनिया ने बताया कि वर्षा से भेड़ों को नमोनिया हो गया था। अब स्थिति पर नियंत्रण कर लिया गया है।

फसलों को मिला फायदा
फाग लगते ही बारिश की झड़ी से हर तरह की फसलों को फायदा हुआ है। बागवानी, मसाले की फसलें, सब्जी, गेहूं, चना और सरसों की फसलों में इस बारिश फायदा होगा। नहरों में पानी की कमी के चलते नहरी क्षेत्र की फसलों के साथ-साथ इस बारिश से बारानी, कुओं से सिंचित फसलों में उपज में बढ़ोतरी होगी। यह बारिश फसलों के लिए वरदान साबित होगी।

जिले में साढ़े तीन लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई की गई है। बांधों में पानी की कमी के चलते सिंचाई की अंतिम बारी इस वर्षा से हो गई है। उपनिदेशक कृषि जगदीश पुनिया ने बताया कि सरसों की फसल फूल लगने की स्थिति में हैं। इस बारिश से इस फसल को फायदा है। जिले में सरसों की 52 हजार हैक्टेयर में बुवाई की गई है।

इसी तरह गेहूं की फसल भी 60 हजार हैक्टेयर में बोई गई है। चना 1 लाख 80 हजार हैक्टेयर में खड़ा है। इन तीन फसलों में इस बारिश से 10 से 15 प्रतिशत उत्पादन में बढ़ोतरी सम्भव है। जिले में मेथी, ईसबगोल एवं जीरे की खड़ी फसलें को भी इस बारिश से फायदा हो सकेगा। पकी हुई खड़ी फसलें और बागवानी की फसलों के लिए भी यह बारिश वरदान साबित होगी। इस बारिश से तापमान में गिरावट से उत्पादन बढ़ेगा।
साथ ही आखिरी सिंचाई के लिए नहरी पानी की बाट नहीं देखनी पड़ेगी।

...और निगम की खुल गई पोल
भूमिगत नाले और सीवरेज हुए फेल, सड़कों पर फैली गंदगी
बीकानेर। शनिवार शाम से शुरू हुई बारिश ने नगर निगम के इंतजामों की पोल खोल दी। पानी निकासी के लिए बने भूमिगत नाले और सीवरेज फेल होने से सड़कों पर गदंगी पसर गई। अधिकांश गली-मौहल्ले पानी से लबालब हो गए। राजमार्गों पर भी पानी भर गया।

यह स्थिति भी तब है जब निगम प्रशासन प्रतिमाह सीवरेज और नालों की सफाई के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान करता है। सीवरेज व्यवस्था की जिम्मेदारी निगम प्रशासन ने दो ठेकेदारों को दे रखी है, लेकिन मॉनिटरिंग नहीं हो रही। ऐसे में मामूली बरसात में ही सीवरेज और नालों की सांसें फूल जाती है।

आपदा प्रबंधन के नाम पर जीरो
नगर निगम आपदा प्रबंधन के नाम पर जीरो साबित हो रहा है। बरसात के बाद शहर के कई हिस्सों में सड़कें धंस गई। बड़े-बड़े गड्ढे बन गए। गजनेर रोड स्थित अनाथालय के नजदीक धंसी सड़क रविवार को कई वाहन चालकों के गिरने का कारण बनी।

इसकी सूचना राहगीरों ने नगर निगम कंट्रोल रूम को भी दी, लेकिन देर रात तक कार्रवाई नहीं हुई। जूनागढ़ के आस-पास पानी जमा हो गया। खस्ताहाल पुरानी गजनेर रोड पर और पुलिस लाइन रोड पर चैम्बर, सीवरेज व गड्ढे वाहनों चालकों के लिए आफत बन गए। निगम कार्यालय के आगे पानी भी भर गया।

मवेशी करंट की चपेट में आए
बरसात के बाद कई जगह मवेिशयों की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। इन्द्रा कॉलोनी स्थित एफसीआई गोदाम के पास खम्बे से प्रवाहित करंट की चपेट में आने से एक बैल की मौके पर ही मौत हो गई। बारह गुवाड़ चौक में शनिवार रात को एक गाय बिजली करंट से मर गई। शिव शंकर छंगाणी ने बताया कि निगम प्रशासन की अनेदखी के चलते रविवार शाम तक मृत पशु को नहीं उठाया गया था।

उधर, इन्द्रा कॉलोनी के पार्षद यशपाल सिंह पडि़हार ने बताया कि क्षेत्र में बरसाती पानी की निकासी नहीं होने से विद्युत खम्भों में पानी में करंट आने लगता है। रविवार को करंट की चपेट में आए बैल को उठाने के लिए नगर निगम के महापौर नारायण चौपड़ा को फोन किया गया, लेकिन देर रात तक मृत पशु मौके पर ही पड़ा रहा। निगम के हेल्प लाइन नम्बर पर कोई फोन तक नहीं उठा रहा था।