
Rajasthan Students Study Abroad : राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस योजना के तहत विदेश में शिक्षा लेना छात्रों के लिए मुश्किल हो रहा है। नई सरकार आने के बाद योजना में नए पेंच फंस रहे हैं। इसका खामियाजा छात्रों को उठाना पड़ रहा है। हाल ही योजना में चयनित हुए छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश तो चले गए लेकिन समय पर स्कॉलरशिप नहीं मिलने के कारण छात्रों ने कर्ज लेकर यूनिवर्सिटी की फीस चुका दी। छात्र जब कॉलेज आयुक्तालय से स्कॉलरशिप मांग रहे हैं तो आयुक्तालय पल्ला झाड़ रहा है। ऐसे में छात्रों के सामने संकट खड़ा हो गया है। छात्र योजना के नाम पर खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
कांग्रेस सरकार के समय स्कॉलरशिप में देरी होने के कारण छात्र अपने स्तर पर फीस जमा करा देते थे। बाद में कॉलेज आयुक्तालय की ओर से छात्रों के खाते में फीस डाल दी जाती थी। कांग्रेस सरकार में यह प्रक्रिया अपनाई जा रही थी, लेकिन नई सरकार आने के बाद यह प्रक्रिया रोक दी गई। अब जिन छात्रों ने अपने स्तर पर यूनिवर्सिटी की फीस जमा करा दी है, उनकी स्कॉलरशिप का भुगतान वित्त विभाग की अनुमति के बाद ही किया जाएगा। कॉलेज आयुक्तालय ने ऐसे छात्रों के प्रकरण वित्त विभाग को भिजवाए हैं।
- आठ लाख तक आय वर्ग : 50 लाख ट्यूशन फीस और प्रतिमाह एक लाख खर्चा
- आठ लाख से 25 लाख आय वर्ग : 50 लाख ट्यूशन फीस और 50 हजार स्थायी फंड
- 25 लाख से अधिक आय वर्ग : 50 लाख ट्यूशन फीस
उच्च शिक्षा विभाग के शासन सचिव सुबीर कुमार का कहना है कि भाजपा की नई सरकार आने के बाद योजना के तहत चयनितों की सूची को रोक दिया गया है। छात्र विदेश शिक्षा लेने के लिए भटक रहे हैं। दरअसल, कांग्रेस सरकार ने योजना के तहत आवेदनों की संख्या 200 से बढ़ाकर 500 तो कर दी, लेकिन स्कॉलरशिप के तहत मिलने वाले बजट की कमी आ गई। वर्ष 2023 में कॉलेज आयुक्तालय ने 500 छात्रों से आवेदन ले लिए। इनमें से 327 को चयन कर विदेश तो भेज दिया पर स्कॉलरशिप की राशि नहीं दी गई। बजट की कमी होने के कारण फेस-3 की सूची जारी नहीं की गई है। छात्र सूची के जारी करने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। इस योजना की फाइल मंत्री स्तर पर परीक्षण के लिए गई है। वहां से आने के बाद छात्रों के हित में निर्णय लिया जा सकेगा।
Published on:
19 Feb 2024 11:30 am

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