
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में बनाए गए 17 नए जिलों की समीक्षा के लिए गठित सेवानिवृत्त आईएएस ललित के. पंवार कमेटी की रिपोर्ट पर सोमवार को कैबिनेट सब कमेटी की बैठक में चर्चा हुई। सीएमओ में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा भी मौजूद रहे।
हालांकि बैठक में जिले बढ़ाने और घटाने को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया। लेकिन, यह संकेत जरूर मिले हैं कि कुछ जिलों में कटौती हो सकती है। संभावित तौर पर छोटे जिलों पर सरकार कैंची चला सकती है। कमेटी की अगली बैठक 15 दिन बाद होगी।
बैठक के बाद जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने छोटे जिलों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक विधानसभा क्षेत्र जितने इलाके को जिला बना दिया तो फिर तो राजस्थान में 200 जिले बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिलों के गठन में मापदंड तो तय होने ही चाहिए। खासकर जनसंख्या को ध्यान में रखना चाहिए। जिलों को लेकर पंवार कमेटी ने क्या आधार बनाए हैं, क्या दूरी होनी चाहिए। इस पर बैठक में चर्चा हुई है, कुछ नए जिलों की भी मांग आ रही है। इन सब पर अगली बैठक में चर्चा होगी।
मंत्री ने कहा कि एक जिले को बनाने में करीब 2000 करोड़ रुपए का खर्चा आता है। 2008 में प्रतापगढ़ जिला बना था। इतने साल बीतने के बावजूद भी वहां पर प्रशासनिक संसाधनों की कमी है। नए जिलों में भी इतनी सारी सहूलियत देने में 8 से 10 साल लग जाएंगे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की 7 करोड़ की जनसंख्या है, उसको प्रशासनिक इकाइयों के हिसाब से मेंटेन करना जरूरी है। जयपुर बड़ा जिला है, कोई छोटा जिला है तो बराबर कैसे हो जाएंगे।
कई नए जिलों में लोगों ने विरोध भी किया है कि उन्हें इस जिले में गलत जोड़ा गया है। कई लोग चाहते हैं कि पुराने जिले में ही रहें। टोडारायसिंह को केकड़ी जिले में जोड़ दिया गया जबकि वहां के लोग चाहते हैं कि टोंक में रहें। इसलिए कमेटी जो भी फैसला लेगी जनता के हित में लिया जाएगा। गौरतलब है कि सेवानिवृत आईएएस ललित के. पंवार ने नए जिलों के गठन को लेकर सरकार को हाल ही रिपोर्ट सौंपी है।
Updated on:
07 Sept 2024 09:31 am
Published on:
03 Sept 2024 08:06 am

बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
