
rajasthan elections 2018-Bharatpur congress chief special interview
जयपुर। भाजपा-कांग्रेस को टक्कर देने के लिए प्रदेश में बन रहे तीसरे मोर्चे की राह आसान नहीं दिख रही है। हालांकि इस बार पिछले चुनावों के मुकाबले तीसरा मोर्चा ताकतवर जरूर दिखाई दे रहा है लेकिन बिखरा-बिखरा सा ही है। तीसरा मोर्चा 3 धड़ों में बंटा दिख रहा है। कुछ दल ‘एकला चलो’ की राह पर हैं तो कुछ ‘संगठन ही शक्ति’ की वकालत कर रहे हैं।
विधायक हनुमान बेनीवाल की रैली में सोमवार को भीड़ और मंच पर भारतवाहिनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी की उपस्थिति ने तीसरे मोर्चे के रूप में सशक्त विकल्प देने की कोशिश की। इसके अलावा सपा और राष्ट्रीय लोकदल के पदाधिकारियों ने रैली में शामिल होकर दिखाने का प्रयास किया कि भाजपा और कांग्रेस से लडऩे के लिए तीसरा मोर्चा रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि कुछ दिन पहले सीपीआइ (एम), सीपीआइ (एमएल), सीपीआइ (यू), जनता दल (एस) और समाजवादी पार्टी ने मिलकर राजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चा का ऐलान किया था। यहां तक कि अमराराम को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में भी घोषित किया जा चुका है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में ये सभी दल मिलकर कुल मतों में से 2 फीसदी भी हासिल करने में सफल नहीं हुए थे।
सपा दिख रही दोनों के साथ
सपा के पदाधिकारी दोनों ही आयोजनों में शामिल हुए। लोकतांत्रिक मोर्चा की बैठक में पार्टी के शैलेंद्र अवस्थी पहुंचे और किसान हुंकार रैली में प्रदेश अध्यक्ष से लेकर यूपी के पूर्व मंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीब संजय लाठर मौजूद रहे। सपा के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश यादव का कहना है कि हम भाजपा और कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने के लिए लड़ रहे हैं। एक जैसी विचारधारा के लोग जहां मिलेंगे पार्टी वहां पर पहुंचेगी।
अकेले चले आप और बसपा
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल अपनी पहली जनसभा में राज्य में अकेले चुनाव लडऩे की बात कह चुके हैं। पार्टी ने अब तक 62 सीटों पर प्रत्याशी भी उतार दिए हैं। कांग्रेस से गठबंधन की बात बिगडऩे के बाद बसपा भी राज्य की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लडऩे की बात कर रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सीताराम मेघवाल ने बताया कि जल्द ही प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि इस बार पार्टी 2008 से भी बेहतर प्रदर्शन करेगी।
ये संभावनाएं
मोर्चा भी राज्य की सभी सीटों पर चुनाव लडऩे की बात कर रहा है। यानी राज्य में कुछ सीटों पर मुकाबला चतुष्कोणीय होगा।
किसान बहुल इलाकों में वामपंथी दम भर रहे हैं। वहीं आप शहरी सीटों से खाता खोलने की उम्मीद लगाए बैठी है। सपा राज्य में जमीन तलाश रही है। बसपा 2008 जैसा प्रदर्शन दोहराने की बात कह रही है। इस बीच विधायक घनश्याम तिवाड़ी और बेनीवाल के एक मंच पर आने से राज्य में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं।
Published on:
31 Oct 2018 11:33 am
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